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इस गांव का नाम सुनते ही छूट जाते हैं लोगों के पसीने, यहां आने से कतराते हैं ग्रामीण


मुंगेली. छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक भूतों का गांव इन दिनों चर्चा में हैं. भूतकछार नाम का यह गांव भूतों के निवास के लिए जाना जाता है. सुदुर वन इलाके के इस गांव में आने से लोग कतराते हैं. इस गांव का नाम सुनकर ही लोगों के पसीने छूट जाते हैं. भूतकछार गांव सुदुर वन इलाके बसा है. इस गांव का नाम ही ऐसा है इसे सुनकर लोगों के पांव कांपने लगते हैं. यहां लोग डर के मारे गांव में आने से कतराते है. दूसरे जगह के लोग जब भूतकछार का नाम सुनते है तो उनके मन में ऐसा लगता है कि मानो ये गांव दूसरे सामान्य गांव की तरह नहीं बल्कि भूतों का कछार(इलाका) भूतकछार होगा. बात इतने में ही खत्म नहीं होती बल्कि गांव में बेटा-बेटी की शादी के लिए भी भटकना पडता है. इस गांव में कोई भी अपनी रिश्तेदारी नहीं जोड़ना चाहता है. इस गांव में रहने वाले ग्रामीण अपने बच्चों के संबंधों के लिए तरस गए हैं. इससे ग्रामीण परेशान हो रहे हैं.

ग्रामीणों ने बताया भूतों का इतिहास
जबकि ग्रामीणों की मानें तो यहां भूत प्रेत जैसी कोई चीज नहीं है. गांव के बुजुर्ग ये जरूर बताते हैं कि यह गांव टाईगर रिजर्व के जंगल का गांव है. कई दशक पहले जब कोई यहां रहने आया तो वो अकेले ही झोपडी बनाकर रहता था. उस समय इस जगह का कोई नाम नहीं था. तब कुछ लोगों को लगा कि यह घने जंगल में ये एक अकेला इंसान भूतों की तरह रहता है तो इस जगह को लोग भूतकछार कहने लगे. तभी से इस गांव का नाम भूतकछार पड़ गया. इसके बाद यहां धीरे धीरे बस्ती बस गई. यह बस्ती धीरे-धीरे बड़ी होती गई और गांव का रूप ले लिया. अब इस गांव का नाम भूतकछार पड़ गया है. मगर इस गांव से जुडे़ डरावने किस्से इतने प्रचलित हैं कि लोग आज भी इस गांव में आने से डरते हैं. जबकि यहां रहने वाले ग्रामीण भी मानते हैं कि यहां कोई भूतप्रेत नहीं है.

बल्कि जंगल का गांव होने से रात में वन्यजीवों की आवाजें आती है. जिसे लोग भूत की आवाज समझ कर डरते हैं. अब इसे अंधविश्वास कहें या सच्चाई.. मगर ये तो तय है कि आसपास में इस गांव के लोग इस नाम से खौफजदा हैं. किसी अनहोनी की आशंका के भय से रात तो रात दिन में भी लोग इस गांव से गुजरने में बचने की कोशिश करते हैं. इस गांव के नाम की पीड़ा को गांव के लोग लंबे समय से झेल रहे हैं. जब कोई इनसे इनके गांव का नाम पूछता है तो ये भूतकछार नहीं बता कर आसपास के गांव का नाम बता देते हैं. क्योंकि जैसे ही ये गांव का नाम भूतकछार बताते हैं वैसे ही सामने वाला व्यक्ति सवालों की झड़ी लगा देता है. भूतकछार सुनकर लोग पूछने लगते हैं कि भूतों का गांव है क्या? क्या आप लोगों ने भूत देखा है. इससे गांव का मजाक उड़ने लगता है.

ग्रामीण बदलवाना चाहते हैं नाम
अब इस नाम से परेशान होकर यहां के ग्रामीण पिछले5 सालों से इसका नाम बदलवाना चाहते हैं. इसको लेकर कई बार आवेदन दिया जा चुका है. लेकिन अभी तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. ग्रामीण चाहते हैं कि गांव का नाम भूतकछार से बदलकर देवगढ़ कर दिया जाए. वहीं मुंगेली के नवपदस्थ कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने जानकारी लेकर नाम बदलने की प्रक्रिया की बात कही है. एक तरफ जहां बडे़-बडे़ शहरों के नाम बड़ी आसानी से बदल रहे हैं, ऐसे में नाम की पीड़ा झेल रहे यहां के ग्रामीण पिछले 5 सालों से परेशान हैं. गांव के नाम की पीड़ा झेल रहे इस भूतकछार गांव के ग्रामीणों की पीडा कब दूर होगी यह देखना होगा.

Tags: Chhattisgarh news

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