Homeछत्तीसगढबस्तर के पहाड़ों पर मिले अनोखे निशान, स्पेसशूट पहने दिख रहे इंसान,...

बस्तर के पहाड़ों पर मिले अनोखे निशान, स्पेसशूट पहने दिख रहे इंसान, छत्तीसगढ़ में क्या आए थे एलियन?


रायपुर/कांकेर. छत्तीसगढ़ के दक्षिण मध्य में स्थित कांकेर जिले के लखनपुरी उपतहसील में है गोटीटोला गांव. राजधानी रायपुर से एनएच -30 में करीब 133 किलोमीटर का सफर करने के बाद आता है लखनपुरी और यहा से लगभग 8 – 10 किलोमीटर ग्रामीण रास्तों से होकर पहुंचते हैं चंदोली और गोटीटोला गांव. ये पूरा इलाका जंगलो से अटा पड़ा है. इसके साथ ही यहां चट्टान और पहाड़ भी काफी ज्यादा है. इन्हीं पहाड़ो में से एक पहाड़ के एक विशालकाय चट्टान पर है वो अनोखा शैलचित्र. गोटीटोला तक तो आपको पक्की सड़क मिल जाती है, लेकिन इसके आगे कोई पक्की सड़क नहीं है. घने जंगलो के अंदर से होकर ही जाना पड़ता है.

सड़क नहीं होने के कारण कोई जानकार आपके साथ होना जरूरी है. वर्ना आप घने जंगलो में भटक सकते हैं. इसके अलावा इस जंगल में तेंदुआ, लकड़बग्घे जैसे खूंखार जानवर भी हैं. लोग बताते है कि यहां सबसे ज्यादा भालू पाए जाते हैं. शैलचित्रों वाले चट्टान तक पहुंचने के लिये. कुछ दूर तक चट्टानी रास्तों से पहाड़ के ऊपर तक चढ़ना पड़ता है. इस जंगल में दूर दूर तक. कोई इंसान नजर नहीं आता. घने जंगल के बीच पूरा सन्नाटा छाया रहता है. इस सन्नाटे में एक पत्ते के खड़कने की आवाज भी मानो गूंज सी जाती है. इस गूंज से रोगटे खड़े हो जाते है. क्योंकि हर वक्त जंगली जानवरो से सामना होने का खतरा बना रहता है. और चौकन्ना रहना पड़ता है.

हैरान करने वाला नजारा
विशाल चट्टान का आकार ही ध्यान खींचता है. इस पर जो चित्रकारी है. उसका एक एक पहलू हैरान करने वाला है. कुछ इंसानों से मिलती जुलती आकृतिया यहां दिखाई देती है. लेकिन ये पूरी तरह से इंसान भी नहीं लगते. इनके दो हाथ, दो पैर, सिर तो दिखाई देते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि ये कोई स्पेससूट भी पहने हुए हैं.पैरों में विशेष तरह के लांग शू और हाथो में ग्लोब्स दिखाई देते है. हाथो में त्रिशूल जैसे सश्त्र भी ये लिये हुए है. चट्टान के निचले हिस्से में पांच चित्र है और इनके दाएं, बाएं और उपर की तरफ बड़ी संख्या में छोटे छोटे इसी तरह के चित्र बने हुए हैं. ऊपर की तरफ तीन चित्र और भी ज्यादा हैरान करते हैं.

इनके सिर पर कोई रेडियो सेंसर लगा हुआ हेलमेट जैसा दिखता है. इनके हाथो में भी त्रिशूल हैं. एक के पीछे एक तीन इसी तरह की आकृति को कुछ इस तरह से उभारा गया है कि लगता है ये जमीन से आकाश की तरफ उड़ कर जा रहे हों. इन आकृतियो में एक तो किसी यूएफओ जैसी दिखाई देती है. यही सारे लक्षण इन्हें एलियन से जोड़ने का आधार बनते है. यहां खड़े होकर मन में ऐसा लगने लगता है कि या तो इन्हें किसी एलियन ने बनाया होगा या जिसने एलियन देखा है उसने बनाया होगा.

अमिट हैं रंग
सबसे बड़ी चीज इन्हें बनाने के लिये जिन पीले और लाल रंगो का इस्तेमाल हुआ है. वो हजारों साल से अमिट है. एक दम खुले में इस चट्टान पर गर्मी बरसात और ठंड का सीधा असर होता है, लेकिन ये रंग इतने पक्के है कि. कोई भी मौसम इन्हें फीका भी नहीं कर सका. बस इनके उपर थोड़ा सा पानी छिड़कते ही ये फिर दमकते हुए उभर जाते हैं. आज 21 वी सदी का आधुनिक विज्ञान आज तक ऐसे रंग नहीं बना सका है. ये बात प्रमाणित है तो इन शैलचित्रों में इस्तेमाल हुए रंग और इसका विज्ञान किसी दूसरे ग्रह के जीवों के पास ही हो सकता है. पृथ्वी पर अभी तक ऐसी तकनीक नहीं है, जो हजारो साल तक रंगो को बरकरार रख सकें तो क्या दूसरे ग्रह के लोग धरती पर आते जाते हैं. अगर आते जाते है तो वो गोटीटोला के जंगल भी आ चुके हैं? हालांकि इन चित्रों को महाभारत के पांडवों से जुड़े होने का दावा किया जा रहा है.

Tags: Chhattisgarh news, Kanker news

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments