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आज फादर्स डे पर अपने पिता को इस अनोखे अंदाज में दीजिए शुभकामनाएं, दिल छू लेगी हर लाइन

OFFICE DESK: फादर्स डे हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। इस साल ये दिन 19 मई को मनाया जाएगा। पिता दिवस मनाने के पीछे की वजह पर गौर किया जाए तो इस दिन को पिता के सम्मान के दिन के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। इस खास दिन को हर कोई अलग तरह से सेलिब्रेट करता है। कुछ पिता को गिफ्त देते हैं, तो वहीं कुछ लोग उनके पसंदीदा खाने को पकाते हैं।

वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो पिता को विश करने के लिए कुछ स्पेशल मैसेज की तलाश में रहते हैं। अपने पिता के लिए अगर आप वॉट्सएप स्टेटस पर कुछ लिखना चाहते हैं तो आप नीचे दी गई किसी कविता को चुन सकते हैं। इन कविताओं की हर एक लाइन काफी खास और यकीनन ये कविताएं आपके पिता के दिल को छू लेंगी।

हर व्यक्ति के जीवन में पिता एक वट वृक्ष की तरह होते हैं, जिसकी छाव में व्यक्ति में खुद को सुरक्षित महसूस करता है। कई अपनी दिल में छिपी बातों को हम बता नहीं पाते है। ऐसे स्थिति में आप आज पिता दिवस पर इस सुंदर संदेश से अपने पिता को खुश कर सकते हैं। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आप फादर्स डे पर अपने पिता को कौन से संदेश भेज सकते हैं

पिता पर लिखीं सुंदर कविताएं

पिता क्या है?

पिता एक उम्मीद है, एक आस है
परिवार की हिम्मत और विश्वास है
बाहर से सख्त अंदर से नर्म है, उसके दिल में दफ्न कई मर्म हैं।

पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है,
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है,
बचपन में खुश करने वाला खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।

पिता जिम्मेदारी से लदी गाड़ी का सार्थी है,
सबको बराबर का हक दिलाता यही एक महारथी है।
सपनों  को पूरा करने में लगने वाली जान है,
इसी से तो मां और बच्चों की पहचान है।

पिता जमीर है पिता जागीर है
जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है।
कहने को सब ऊपर वाला देता है
पर खुदा का गी एक रूप पिता का शरीर है।

पिता पर गर्व

जब किसी मुश्किल सवाल का जवाब हो न पता
तब याद आते हैं मुझे अपने प्यारे पिता।

लगते हैं वो बाहर से थोड़े सख्त
पर हमेशा देते हैं मुझको अपना वक्त

बुरी संगत में न मैं पड़ जाऊं
इसलिए रखते हैं मुझपर नजर।

जब भी पिता बाजार जाते हैं
मेरे लिए जरूर कुछ लाते हैं।

मुझे अपने पिताजी पक बहुत गर्व है
पिता साथ है, तो खुश हर पर्व है।

जिसे हम पापा कहते हैं

हर घर में होता है वो इंसान
जिसे हम पापा कहते हैं
सभी की खुशियों का ध्यान रखते
हर किसी की इच्छा पूरी करते
खुद गरीब और बच्चों को अमीर बनाते
जिसे हम पापा बुलाते

बड़ों की सेवा, भाई-बहनों से लगाव
पत्नी को प्यार, बच्चों को दुलार
खोलते सभी ख्वाहिशों के द्वार
जिसे हम पापा कहते है।

बेटी की शादी, बेटों को मकान
बहुओं की खुशियां, दामादों का मान
कुछ ऐसे ही सफर में गुजारे वो हर शाम
जिसे हम पापा कहते हैं

मैं अपने पापा का दीवाना

एक बचपन का जमाना था
जिस में खुशियों का खजाना था
चाहत चांद को पाने की थी
पर दिल तितली का दीवाना था
खबर न थी, कुछ सुबह ती
ना शाम का कोई ठिकाना था।

थक कर आना स्कूल से, पर खेलने भी तो जाना था
मां की कहानी थी, परियों का फसाना था।
बारिश में कागज की नाव थी, हर मौसम सुहाना था।
रोने की कोई वजह न थी,
और मैं अपने ‘पापा’ का दीवाना था।

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