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छत्तीसगढ़ी म पढ़व- हाथ उचा के दिस अऊ किहिस जा रोजी रोजगार करले


लगे रहिबे त थोरे थोर मा कतको अकन सकला जथे.सकेलने वाला ला सबो जान डारथें.ओ दिन अऊ ए दिन मा कतका फरक हे तेला ते नई जाने फेर तोला जानने वाला कतको झन पीठ पाछू तोर बड़ाई करत नइ अधावंय. ए दुनिया संसार मा अइसनहे उदाहरन कतको हे.त चलन हमर नवजवान संगी मन आजे ले कुछु न कुछु करे के प्रयास करी अऊ देर सबेर ही सही चार पईसा अपन हाथ मा राखे के उदिम करहीं.

छान्ही ला गन के आबादी के गणना हो जथे
तईहा ले के आजो हमर सियान बबा मन अपन गांव मा का चलत हे तेला घर बईठे जान डारथें.चार दुवारी छोड़ के फलाना के घर ला देख आज कहां ले कहां निकलगे.लगे रिहिस तभे तो आज वोखर बड़ई होवत हे.अइसनहे कतको झन अपन पहिचान बनाईन. पढ़ाई लिखाई करिन अऊ दुनिया मा बगर गिन.

दिन बुलकत रईथे अऊ दिन के सुरता नई भुलावय
करार करे रेहेंव अऊ करारी रूपया ला अपन बयपार मा लगाएंव अऊ रोजीना हिसाब लगावत नफा-नुकसान ला खुदे जानत राहंव. कोनो ला बताए के दिन आही त मोर अनुभो ला बताहूं काबर के बेरोजगारी के रोना रोवइया कतको मिल जाही फेर मिल बईठ के चर्चा करईया के आज मान बाढ़ गेहे.दिन निकल ही अऊ चिरई चुरगुन मन अपन डेरा ला छोड़ के उड़ा जाही.दिन बुड़ती फेर अपन डेरा मा.चिरई खोंधरा मा लइका चिरई के पालन-पोषण होतेच रइथे.

मनिहारी के दुकान अऊ गाँव-गाँव फेरा
एके जगा राह नईते गाँव-गाँव पारा मोहल्ला मा फेरा लगा. चउंक चौगडडा मा खड़ा होगे हांका लगा के देख. देवईया सबो डहर देखत हे तोला डहर चलती मा चार पईसा के कमाई होही अऊ लोग लइका मन सुख के छइहाँ मा रहिके काली तोर नाम ला उजागर करहीं. बने पढ़ लिख के अफसर बाबू बनही नईते अपन रोजगार चलाके मानुस जीवन ला सुखी समृद्ध बनाहीं.

(मीर अली मीर छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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