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नक्सलियों से सीधी लड़ाई के लिए तैयार हैं थर्ड जेंडर, बोले- लोगों ने सिर्फ हमारा नाच-गाना देखा है, लेकिन अब…


रायपुर. ‘इंटरनेट पर ”बस्तर फाइटर्स” सर्च कीजिए तो आपको इससे जुड़ी तमाम खबरें, सोशल मीडिया पर बयान-बाजियां मिल जाएंगी. आपको यह भी पता चल जाएगा कि बस्तर फाइटर्स बनने बड़ी संख्या में आदिवासी लड़के-लड़कियां उत्सुक हैं. हजारों आवेदन आए हैं. लेकिन हजारों लड़के-लड़कियों के आवेदनों की संख्या के साथ ही करीब डेढ़ दर्जन उन आवेदकों पर चर्चा अब तक कम या न के बराबर ही हुई है. जो ऐसे वर्ग से हैं, जिन्हें सामाजिक व्यवस्था में दशकों से हाशिये पर ही रख गया है.’ जेंडर इक्वेलिटी पर गहरी समझ रखने वाले युवा विनयशील ‘बस्तर फाइटर्स’ के लिए थर्ड जेंडर के आवेदकों पर बातचीत की शुरुआत कुछ इस तरह ही करते हैं.

बस्तर फाइटर्स में थर्ड जेंडर समूह से कांकेर जिले से आवेदन करने वाली ट्रांस वुमेन दिव्या भर्ती को लेकर काफी उत्सुक हैं. शारीरिक दक्षता परीक्षा में दिव्या को 100 में 100 अंक मिले हैं और अब लिखित परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं. न्यूज 18 से बातचीत में दिव्या कहती हैं- ”नक्सलियों से सीधी लड़ाई के लिए हम तैयार हैं. शहीद हो गए तो इससे बड़ा मान कुछ नहीं होगा. अब तक तो समाज से हमें तिरस्कार और लानत ही मिली है. लोग कहते हैं- तुम किन्नर हो क्या करोगे. हम उन्हें जवाब देना चाहते हैं कि हमें मौका मिले तो हम खुद को हर क्षेत्र में साबित कर देंगे.”

मैदान पर बेजोड़ मेहनत
कांकेर के कोकपुर गांव की रहने वाली ट्रांस दिव्या हॉकी की जिला स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं. दिव्या बताती हैं कि मैंदान में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. उनके ही साथी दौड़ने और चलने को लेकर कमेंट करते थे, लेकिन मेरी खेल प्रतिभा की वजह से ही मुझे मेजर ध्यानचंद की जयंती पर बेहतर खेल के लिए पुरस्कृत किया गया. बस्तर फाइटर्स के लिए मैंने और मेरे साथियों ने बेजोड़ मेहनत की है. खूब पसीने बहाए हैं. हम तो भारत सरकार से भी अपील करते हैं कि हमें सेना के हर विंग में काम करने का मौका मिले.

बस्तर जिले से आवेदन करने वाली आदिवासी ट्रांस बरखा बघेल ने भी ‘बस्तर फाइटर्स’ का फिजिकल टेस्ट पास कर लिया है और वे लिखित परीक्षा की तैयारियों में जुटी हैं. 24 वर्षीय बरखा कहती हैं- ”ट्रांस के रूप में मुझे पहचान बनाने में काफी मुसिबतों का सामना करना पड़ा, लड़ाइयां लड़नी पड़ी हैं. घर से मारपीट कर भगा दिया जाना, समाज में भद्दे कमेंट, समुदाय के लोगों द्वारा भी परेशान किया जाना. लगभग हर वर्ग से लड़ाई लड़ी और जीती भी. उन लड़ाइयों के सामने नक्सलियों से लड़ाई कौन सी बड़ी बात है. ये लड़ाई तो देश के लिए लड़नी है, हम तैयार हैं. अब तक लोगों ने हमारे नाच-गाने, तालियां बजाना, भीख मांगना देखा है, अब अगर मौका मिला तो वे देश के लिए हमारा जुनून देखेंगे”
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मिला पुलिस का साथ
दिव्या और बरखा की तरह ही ट्रांस रिया मंडावी, रानी मंडावी, शानु करगा, सीमा प्रधान, हिमांशी शोरी, दामिनी कोर्राम, संध्या पटेल ने भी बस्तर फाइटर्स का फिजिकल टेस्ट पास कर लिया है. अब लिखित परीक्षा और उसके बाद अंतिम परिणाम का इंतजार है. दिव्या बताती हैं कि फिजिकल टेस्ट के लिए पुलिस विभाग के अधिकारी और समाज कल्याण विभाग से भी उन्हें काफी मदद मिली है. पुलिस के अफसरों ने ही ट्रेनिंग भी दी. उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए तैयार किया. तृतीय लिंग समुदाय के लिए काम करने वाली मितवा संकल्प समिति द्वारा ही हमें मार्गदर्शन मिला और आवेदन भरने से लेकर अन्य प्रक्रियाएं भी करवाई गईं.

क्यों खास है बस्तर फाइटर्स योजना?
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के जिलों में सुरक्षा बलों की ताकत बढ़ाने के लिए बस्तर फाइटर्स नामक पुलिस के विशेष बल का गठन गठन किया जा रहा है. इसके तहत बस्तर, दन्तेवाड़ा, कांकेर, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और कोण्डागांव में बस्तर फाईटर्स 2100 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया की जा रही है. हर जिले में आरक्षक के 300 पद भरे जाएंगे. इस भर्ती का नक्सली विरोध भी कर चुके हैं. बस्तर संभाग के पुलिस आईजी आईपीएस सुंदरराज पी का कहना है कि बस्तर के अंदरूनी एवं वनांचल क्षेत्र के युवाओं को अधिक से अधिक संख्या में क्षेत्र की शांति, विकास, सुरक्षा के साथ-साथ रोजगार के अवसर देने के उद्देश्य से शैक्षणिक योग्यता, आयु एवं शारीरिक अर्हता (ऊंचाई एवं सीना) में शिथलीकरण किया गया है.

आईजी पुलिस सुंदरराज ने बताया कि बस्तर फाइटर्स के लिए कुल 7 जिलों में कुल 53 हजार 336 आवेदन मिले थे. इनमें से 16 आवेदन तृतीय लिंग समुदाय से थे. जबकि 37 हजार 498 पुरुष और 15 हजार 822 महिला श्रेणी से आवेदन मिले थे. 9 मई 2022 से 15 जून 2022 तक अभ्यथियों का दस्तावेजों की छानबीन, शारीरिक मापतौल एवं शारीरिक दक्षता परीक्षा ली गई. इसमें शारीरिक दक्षता परीक्षा अंतर्गत लम्बी कूद 20 अंक, ऊंची कूद 20 अंक, गोला फेंक 20 अंक, 100 मीटर दौड़ 20 अंक एवं 3000 मीटर दौड़ 20 अंक कुल 100 अंकों निर्धारित थे. शारीरिक दक्षता परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद 4 हजार 689 पुरुष, 707 महिला एवं 9 तृतीय लिंग उम्मीदवार आगामी लिखित परीक्षा के लिए योग्य पाये गये हैं. अब 50 अंको का लिखित परीक्षा और उसके बाद 20 अंकों का साक्षात्कार के बाद चयन सूची जारी कर दी जाएगी. बस्तर आईजी का दावा है कि 15 अगस्त तक ये प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
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हर क्षेत्र की हकदार हैं थर्ड जेंडर
समाज के वंचित वर्ग के लिए काम करने वाली राष्ट्रीय संस्था गूंज के छत्तीसगढ़ समन्वयक प्रहलाद पटेल का कहना है कि “निश्चित तौर पर अब सरकार के स्तर पर तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को मौका दिया जाने लगा है. फिर भी मौके बढ़ाने की जरूरत है. पुलिस ही नहीं सरकार के हर विभाग में तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को मौका दिया जाना चाहिए. क्योंकि अब तक थोड़ा-बहुत जितना भी मौका इस वर्ग को मुख्यधारा में जुड़ने के लिए मिला है, उसमें उन्होंने खुद को साबित किया है. मौकों से ही वे मुख्यधारा में जुड़ सकेंगे.”

राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई संगोष्ठियों में जेंडर इक्वेलिटी पर अपनी बात रख चुके विनयशील कहते हैं- “थर्ड जेंडर के लोग भी राज्य के उतने ही नागरिक हैं, जितने की अन्य लोग. बस अंतर यह है कि उनकी पहचान के कारण उन्हें वह मूल अधिकार स्वतः हासिल नहीं हैं, जो अन्य लोगों को मिले हैं. यहीं सरकार की भूमिका है. सरकार के सभी संस्थाओं और पदों में थर्ड जेंडर का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए. बस्तर फाइटर्स में थर्ड जेंडर के आवेदकों का चयन हो या न हो, लेकिन उनके जुनून और हौसले को सम्मानित किया जाना चाहिए.”

40 हजार से ज्यादा जवान तैनात
भारत की सबसे बड़ी आंतरिक समस्याओं में एक नक्सल हिंसा भी है. पुलिस से मिले एक आंकड़े के मुताबिक जनवरी 2018 से अप्रैल 2022 तक बस्तर में नक्सल हिंसा की कुल 1408 घटनाएं हुई हैं. इनमें सुरक्षा बलों के 165 जवान शहीद हुए हैं. जबकि इन हिंसाओं में 218 आम नागरिक भी मारे गए हैं. बस्तर संभाग के आईजी सुंदरराज की मानें तो नक्सल समस्या से निपटने के लिए बस्तर संभाग में विभिन्न सुरक्षा बलों के 40 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं. इसमें जिला पुलिस बल, डीआरजी, सीएएफ के अलावा केन्द्रीय रिजर्व बल सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी के जवान भी शामिल हैं. बस्तर फाइटर्स की भर्ती के बाद इन जवानों की ताकत और बढ़ेगी. हालांकि नक्सल मोर्चे पर थर्ड जेंडर की तैनाती को लेकर आईजी कहते हैं- ”अभी भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. अंतिम सूची जारी होने के बाद इसपर निर्णय होना है. हालांकि किसी की भी योग्यता में उसके जेंडर की बाध्यता नहीं होती.”

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