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बिना सर्जरी युवक के लीवर से निकाला मवाद : महारानी अस्पताल में पिग टेल पाइप कैथेराइजेशन से इलाज ; ऐसा करने वाला प्रदेश का पहला जिला अस्पताल

बिना सर्जरी युवक के लीवर से निकाला मवाद:महारानी अस्पताल में पिग टेल पाइप कैथेराइजेशन से इलाज; ऐसा करने वाला प्रदेश का पहला जिला अस्पताल

OFFICE DESK JAGDALPUR : छत्तीसगढ़ में जगदलपुर के महारानी अस्पताल में पिग टेल पाइप कैथेटराइजेशन से इलाज की शुरुआत हो गई है।

युवक के लिवर से 1 पाव मवाद बीना सर्जरी किए निकाला गया है।
युवक के लिवर से 1 पाव मवाद बीना सर्जरी किए निकाला गया है।

बस्तर जिले के एक युवक के लिवर से बीना सर्जरी किए इस तकनीकी से मवाद निकाला गया।छत्तीसगढ़ में सरकारी चिकित्सा संस्थाओं में से रायपुर के डॉ भीमराव अंबेडकर अस्पताल, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एवं छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर जैसे बड़े अस्पतालों में सोनोग्राफी से पिग टेल पाइप प्रक्रिया सामान्य तौर से की जाती है।

महारानी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ संजय प्रसाद ने बताया कि, बकावंड विकासखंड के 20 साल के एक युवक का सफल उपचार अस्पताल में किया गया है।

युवक के लिवर में मवाद भर गया था। 9 जून को उसे अस्पताल में भर्ती युवक की सोनोग्राफी के दौरान रेडियोलॉजिस्ट डॉ मनीष मेश्राम ने लिवर में लगभग एक पाव मवाद होना पाया।

जिसके बाद सर्जन डॉ दिव्या और रेडियोलॉजिस्ट डॉ मनीष मेश्राम ने युवक के लिवर का एक पाव मवाद सोनोग्राफी और पिग टेल पाइप के माध्यम से निकाला।

बस्तर में ऐसा पहली बार

महारानी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ संजय प्रसाद ने बताया कि सोनोग्राफी से पिग टेल पाइप प्रक्रिया की सुविधा संभाग में सबसे पहले उपलब्ध कराना महारानी अस्पताल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

संभवतः छत्तीसगढ़ के जिला चिकित्सालय स्तर पर रेडियोलॉजी विभाग में पिग टेल पाइप से मवाद निकालने की प्रक्रिया सबसे पहले महारानी अस्पताल जगदलपुर में की गई है।

सरकारी संस्थाओं से अलग निजी संस्थाओं में यह प्रक्रिया बहुत ही महंगी होती है। यह बहुत ही उन्नत तकनीक प्रक्रिया है। इसका फायदा अब बस्तर के लोगों को मिलेगा।

जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सर्जन डॉ दिव्या का कहना है कि, आमतौर पर शरीर के किसी अंग में मवाद भरने पर अंग के खराब होने तक की नौबत आ जाती है।

ऐसे में हमारे शरीर के बहुमूल्य अंग को बचाने के लिए मवाद को बाहर निकालना एवं उसका उपचार करना जरूरी हो जाता है। ऐसे मवाद की अधिक मात्रा को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन का सहारा लेना पड़ता है,

जिसमें पेट में चीरा लगाकर उक्त अंग तक पहुंचा जाता है और मवाद निकालने की प्रक्रिया की जाती है। मरीज की शारीरिक अवस्थानुसार इस प्रक्रिया में कई बार साइड इफेक्ट भी देखने को मिलता है।

अब सोनोग्राफी की आधुनिक पद्धति पिग टेल पाइप से केवल एक छोटा छिद्र करके पतले पाइप से मवाद को बाहर निकाला जा सकता है। यह प्रक्रिया इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के अंतर्गत आती है।

इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी वर्तमान समय में चिकित्सा विभाग की अत्यधिक उन्नत, विशेष कुशलता एवं गुणवत्ता युक्त शाखा है। इसमें सीटी स्कैन एवं सोनोग्राफी की सहायता से शरीर की विभिन्न बीमारियों का इलाज केवल एक पतली पाइप की सहायता से कर दिया जाता है।

इसमें सीटी स्कैन से दिमाग, पेट, हाथ या पैरों के रक्त की नसों की विभिन्न बीमारियों तथा सोनोग्राफी से पेट के विभिन्न बीमारियों का इलाज किया जाता है।

यह भी जानिए

  • सोनोग्राफी उपलब्ध हो जाती है। इसके खर्चे भी बहुत कम होते है। पिग टेल से मवाद निकालने लोकल एनेस्थेसिया दिया जाता है जिसमे एनेस्थेसिया विशेषज्ञ की जरूरत नही पड़ती।
  • इसमें मरीज को बेहोश नही किया जाता।
  • मरीज सचेत अवस्था में ही रहते हैं और उन्हें ज्यादा किसी दर्द का अहसास भी नहीं होता।
  • पिग टेल पाइप की प्रक्रिया बहुत ही कम समय में पूरी हो जाती है।
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