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हजारों मील चलकर पाकिस्तान-श्रीलंका से मानसून की खबर लाते हैं ये पक्षी, शिव मंदिर के पास लगाते हैं डेरा


कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की ऐतिहासिक व धार्मिक नगरी कनकी में इन दिनों प्रवासी पक्षियों ने अपना डेरा डाल दिया है. हर वर्ष ये पक्षी मानसून के आने का पैगाम लेकर आते हैं. अनुकूल वातावरण और पर्याप्त भोजन इन्हें यहं तक खींच लाती है. प्रजनन के लिए पहुंचने वाले इन पक्षियों के आते ही ग्रामीणों में खुशियं बढ़ जाती है. कनकी गांव कोरबा जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित है. ऐतिहासिक नगरी कनकी का शिव मंदिर यहं की विशेष पहचान है. स्वछंद आकाश में विचरण करत ये पक्षी हजारों मील की यात्रा तय कर कनकी पहुंचे हैं.

यहां पहुंचने वाले पक्षियों में एशियन ओपन बिल स्टार्क भी शामिल हैं. ये पक्षी दक्षिण पूर्व एशिया मुख्य रूप से पाकिस्तान, श्रीलंका और दक्षिण भारत में पाए जाते हैं. इन खूबसूरत पक्षियों का आने का समय 15 मई से मानसून शुरू होने तक रहता है. जुलाई से सितम्बर तक पेड़ों में अंडा देने घोसला बनाते हैं. अंडा से बच्चा देने के बाद अक्टूबर में प्रवासी पक्षी वापस अपने देश लौट जाते हैं. लिटिल कारमोरेन्टस (जल मुर्गी) और एशियन ओपन बिल स्टार्क दोनों प्रवासी पक्षियों की संख्या ढाई हजार से अधिक होती है.

ग्रामीणों में खुशी की लहर
ग्रामीणों की मानें तो प्रवासी पक्षियों के दस्तक से गांव में हर साल खुशहाली दौड़ जाती है. यूं कहें कि गांव में मानसून का संदेश और गांव की खुशहाली लेकर आते इन पक्षियो का झुंड ग्रामीणों के लिए बेहद खास है. यही कारण है कि ग्रामीण इन पक्षियों का शिकार करने वाले शिकारियों को उल्टे पांव भगाते हैं. प्रवासी पक्षी पिछले कई दशकों से हजारों मील यात्रा कर कनकी पहुंच रहे हैं. पर्याप्त भोजन और हसदेव नदी की नमी इन पक्षियों को सुकून देती है. वन विभाग ने प्रवासी पक्षी धाम कनकी का बोर्ड भी लगाया है. ताकि आने वाले पर्यटकों को इसकी जानकारी मिल सके. प्रवासी पक्षियों को किसी प्रकार की कोई परेशान ना हो इसलिए वन कर्मी इन पक्षियों पर खास नजरे रखे हुये हैं.

बिल्ली से बचाने के लिए लगाए तार
वन मंडल कोरबा द्वारा संरक्षण की दिशा में शासन ने लैंको संयंत्र के सहयोग से पक्षियों के घोंसले को बिल्ली से बचाने के लिए पेड़ों में कटीला तार लगाया है. साथ ही आकाशीय बिजली से बचाने ताड़ीचालक भी लगया गया है. कुछ वर्ष पहले हुदहुद तूफान और आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दर्जनों पक्षियों की मौत हो गई थी. वन विभाग ने पर्यटन की दृष्टि से गार्डन और तालाब टॉवर के लिए प्रस्ताव जरूर भेजा है, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हो सकी है.

Tags: Chhattisgarh news, Korba news

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