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नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 260 बंद स्कूलों में फिर बजेगी घंटी, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिले के 11 हजार से अधिक बच्चों तक पहुंचेगा शिक्षा का उजियारा

राष्ट्रवादी न्यूज / अनिकेत शिवहरे / सम्यक नाहटा

ऑफिस डेस्क।  छत्तीसगढ़ सरकार के विकास, विश्वास और सुरक्षा के मूलमंत्र के चलते बस्तर अंचल के वातावरण में तेजी से सकारात्मक बदलाव दिखने लगा है.

नक्सल प्रभावित चार जिलों में समुदाय की आकांक्षा के अनुरूप राज्य शासन ने 260 बंद स्कूलों को फिर खोलने का निर्णय लिया है.

जिला बीजापुर में 158, सुकमा में 97, नारायणपुर में 4 और दंतेवाड़ा में एक स्कूल को फिर से खोला जा रहा है. इन स्कूलों से 11 हजार 13 विद्यार्थियों को शिक्षा सुलभ होगी. राज्य स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर 16 जून को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन स्कूलों को फिर से खोले जाने की घोषणा करेंगे.

पोटाकेबिन में पढ़ते थे नक्सली इलाके के बच्चे

 लगभग 15 वर्ष पूर्व नक्सल इलाकों में 400 से अधिक स्कूलों को विभिन्न कारणों से बंद कर दिया गया था. भीतरी इलाकों में रहने वाले परिवारों को सलवा जुडूम के चलते कैंप में रहने की सुविधा देकर सुरक्षित स्थानों में रखने का प्रयास किया गया. धीरे-धीरे ये परिवार कैंपों से वापस अपने गांव लौटने लगे. इनके बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था स्कूलों के नष्ट हो जाने की वजह से नहीं हो पा रही थी. कुछ सुरक्षित इलाकों में शासन द्वारा पोटाकेबिन खोलकर ऐसे इलाकों के बच्चों को शांत स्थलों में सड़क किनारे आवासीय सुविधा देकर पढ़ाने में सहयोग दिया गया.

लोगों की मांग पर बनाए गए हैं स्कूल भवन

स्थिति सामान्य होने पर स्थानीय स्तर पर समुदाय द्वारा उनके गांवों में स्कूलों को पुनः संचालित करने की मांग सामने आने लगी. ऐसी स्थिति में जिन इलाकों में समुदाय से मांग आने लगी और बहुत से स्कूलों से बाह्य बच्चों की उपलब्धता मिली, वहां समुदाय के सहयोग से स्थानीय स्तर पर कच्चे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से स्कूल भवन निर्मित किए गए या उपलब्ध कराए गए. जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय खनिज मद से स्थानीय युवाओं को शिक्षादूत के रूप में बच्चों को सीखने में सहयोग देने की जिम्मेदारी दी गई.

बच्चों को देंगे गुणवत्ता परक शिक्षा

नक्सल प्रभावित चार जिलों-नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर एवं सुकमा में 260 स्कूलों में सफल संचालन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं जैसे – बच्चों को दर्ज करना, पोटाकेबिन या कहीं और पढ़ रहे बच्चों को अपने परिवार के साथ रहकर इन स्कूलों में प्रवेश दिलवाना, इन स्कूलों में शिक्षादूतों के साथ-साथ शिक्षकों की व्यवस्था, सीखने-सीखाने के लिए सभी अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करते हुए बच्चों को गुणवत्ता परक शिक्षा देने के सभी प्रयास किए जाएंगे.

 

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