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नेताजी की जयंती राजीव भवन में गरिमा व सादगी के साथ मनाई गई……

नेताजी की जयंती राजीव भवन में गरिमा व सादगी के साथ मनाई गई

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी व बड़े नेता
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा….!!
जय हिंद….!

जैसे करिश्माई नारों से देश की आजादी की लड़ाई को नई ऊर्जा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर सादर नमन – राजीव शर्मा

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अमर रहे…जब तक सूरज चांद रहेगा नेताजी का नाम रहेगा….

जगदलपुर :- बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी (शहर) द्वारा राजीव भवन में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती सादगी और गरिमा के साथ मनाई, सर्वप्रथम उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कांग्रेस परिवार के द्वारा भावभिनी श्रद्धांजलि दी गई।

तदुपरांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के लोकप्रिय युवा अध्यक्ष राजीव शर्मा ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया

कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती था

वह एक अपने जमाने के मशहूर वकील थे नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में की तत्पश्चात उनकी शिक्षा कोलकत्ता के रेजीडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज में हुई और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिए उनके माता-पिता ने उन्हें इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया

अंग्रेजी शासन काल में भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत कठिन था किंतु उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया 1921 में भारत में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों का समाचार पाकर बोस ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और शीघ्र भारत लौट आए

सिविल सर्विस छोड़ने के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के अहिंसा विचारों से सहमत नहीं थे वास्तव में महात्मा गांधी को उदार दल का नेतृत्व करते थे

और सुभाष चंद्र बोस जोशीले क्रांतिकारी के प्रिय थे महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस के विचार भिन्न-भिन्न थे लेकिन वे यह अच्छी तरह जानते थे कि महात्मा गांधी और उनका मकसद एक है यानी देश की आजादी सबसे पहले गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर नेताजी ने ही संबोधित किया था।

संसदीय सचिव/विधायक रेखचन्द जैन ने कहा कि 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया नेताजी के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चंद्र बोस ने सशक्त क्रांति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार की स्थापना की तथा आजाद हिंद फौज का गठन किया नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुंचे

 

यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” दिया। 18 अगस्त 1945 को टोक्यो जाते समय ताइवान के पास नेताजी का एक हवाई दुर्घटना में निधन हो गया बताया जाता है कि उनका शव आज तक नहीं मिल पाया नेताजी के मौत के कारणों पर आज भी विवाद बना हुआ है।

महापौर सफीरा साहू व पर्यवेक्षक शंकर ध्रुवा ने कहा कि राजनीति में आने से पहले नेताजी ने पूरी दुनिया का भ्रमण किया वह 1933 से 36 तक यूरोप में रहे यूरोप में हिटलर के नाजीवाद और मुसोलिनी के फासीवाद का दौर था नाजीवाद और फासीवाद का निशाना इंग्लैंड था

जिसने पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी पर एकतरफा समझौते थोपे थे वे उसका बदला इंग्लैंड से लेना चाहते थे भारत पर भी अंग्रेजों का कब्जा था और इंग्लैंड के खिलाफ लड़ाई में नेताजी को हिटलर और मुसोलिनी में भविष्य का मित्र दिखाई पड़ रहा था दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है उनका मानना था

कि स्वतंत्रता हासिल करने के लिए राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक और सैन्य सहयोग की भी जरूरत पड़ती है नेताजी हिटलर से मिले उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत और देश की आजादी के लिए कई काम किए उन्होंने आजाद हिंद फौज की कमान अपने हाथों में ले ली थी

उस वक्त रासबिहारी बोस आजाद हिंद फौज के नेता थे उन्होंने आजाद हिंद फौज का पुनर्गठन किया महिलाओं के लिए रानी झांसी रेजीमेंट का भी गठन किया जिसकी लक्ष्मी सहगल कैप्टन बनी।

श्रद्धांजलि सभा मे प्रदेश/जिला/ब्लॉक पदाधिकारी,प्रभारीगण, सेवादल,युवक कांग्रेस,महिला कांग्रेस,एनएसयूआई अन्य मोर्चा/प्रकोष्ठ/विभाग के अध्यक्ष पदाधिकारी,सोशल मीडिया के प्रक्षिक्षित सदस्यगण,नगर निगम/त्रि-स्तरीय पंचायत के जनप्रतिनिधिगण सहित वरिष्ठ कांग्रेसी एवं कार्यकर्तागण उपस्थित थे।

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