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विशेष :- गौठानों में संवर रही महिलाओं की जिंदगी, गोबर के आकर्षक सामान बनाकर महिलाएं हो रही समृद्ध….

विशेष :- गौठानों में संवर रही महिलाओं की जिंदगी, गोबर के आकर्षक सामान बनाकर महिलाएं हो रही समृद्ध

रायपुर :- आर्थिक रूप से  सशक्त महिलाएं किसी भी समाज के लिए एक मज़बूत आधार होती हैं. एक महिला की ज़िन्दगी का संवर जाना पूरे परिवार का संवर जाना होता है..

महिलाएं संघर्ष करने में एकाकी हो सकती हैं, मगर विकास वे सामूहिक ही करती हैं… यही हो रहा है छत्तीसगढ़ राज्य में भी,जहां सरकार के प्रयासों से महिलाओं की जिंदगी में अभूतपूर्व बदलाव दिखाई देने लगा है.

ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने वाली गोधन न्याय योजना ने महिलाओं के हित वो काम कर दिखाया है, जिसके विषय में इससे पहले सोचा भी नहीं जा सका था.

भूपेश सरकार की इस योजना के तहत अब छत्तीसगढ़ की महिलाएं गोबर से तैयार कर रही हैं फ़्लोटिंग दीपक, मोबाइल स्टैंड, गुल्लक, मटकी जैसे उत्पाद. ऐसा नायाब उत्पाद बाज़ार के लिए कौतुहल की वस्तु बनी हुई है

और इसके निर्मात्रियों के लिए भरपूर आमदनी का जरिया.  छत्तीसगढ़ में तैयार होने वाले फ्यूज़न दीप रंगोली की पुणे और नोएडा जैसे बड़े शहरों में बढ़ती मांग ने छत्तीसगढ़ की इन ग्रामीण महिलाओं की आत्मशक्ति को बहुत बढ़ाया है..

गोबर से तैयार होने वाली सजावटी वस्तुएं देश के सभी राज्यों में बिक कर महिलाओं के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन रहीं हैं. ग्रामीण परिवेश में आसानी से उपलब्ध संसाधन को ,

जब एक शानदार जीवन यापन का जरिया बना दिया जाए तो ऐसा ही चमत्कार देखने को मिलता है. छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार की नवाचारी गोधन न्याय योजना से खासतौर पर महिलाओं के बहुत सारे हित एक ही साथ सध रहे हैं.

गोबर से बनने वाले वर्मी कम्पोस्ट अपनी तरह की धूम मचा रहा है और दूसरी तरफ गोबर से बनने वाले घरेलु और सजावटी सामान बिक जाने का अपना अलग कीर्तिमान गढ़ रहा है.

कल्पनातित बातें छत्तीसगढ़ की धरती पर आकार पा रही हैं.. इस परिस्थिति को निर्मित करना किसी दूरदर्शी मुखिया के बस की ही बात होनी चाहिए.

गोधन न्याय योजना से जुड़ी छत्तीसगढ़ की विभिन्न महिला समूहों के द्वारा इस दीवाली घरों को रौशन करने के लिए गोबर से बनी हुई फ्यूजन दीप के अलावा गोबर से फ्लोटिंग दीया, बंदनवार, मोबाईल स्टैंड, हैंगिंग शो.पीस जैसे कई सजावटी उत्पाद बनाया गया.

बेहतरीन कलाकारी, नूतन प्रयोग और नक्काशी ने उन सबों का दिल जीता है, जिसे  इन कलाकृतियों को करीब से निहारने का मौका मिला और बताने जैसी बात तो ये है

कि देश के बड़े.बड़े शहरों से इन चीजों की मांग आने लगी है.. छत्तीसगढ़ के लगभग 8 हजार गांवों में बनाए गए गौठानों से अनेक महिला स्व.सहायता समूहों के द्वारा छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियॉ संचालित की जा रही है.. यही छोटी-छोटी गतिविधियां बेहतरीन अंजाम दिखा रही है.

ना जाने कौन सा छोटा प्रयास इन महिलाओं के लिए विराट सफलता की वजह बन जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. महिला स्व सहायता समूहों के द्वारा गोबर और मिट्टी के मिश्रण से तैयार होने वाली घरेलु उपयोगी सजावटी समान बना कर उनका रूख बाज़ार की तरफ करके समृद्धि का मुख अपनी ओर कर लिया है.

छत्तीसगढ़ की महिला शक्ति को मिलने वाली सफलता को देखकर कहा जा सकता है कि सितारों से आगे जहां और भी है.. यदि गोबर के सजावटी सामान इतना सम्मान, सफलता और समृद्धि दिला सकता है

तो अभी तो और भी ना जाने कितनी ऐसी चीजे़ छत्तीसगढ़ की भूमि में यू ही बिखरी पड़ी है, जो यहॉ पीढ़ियों की जिन्दगी संवार दे. गोबर से बनने वाली घरेलु और सजावटी सामानों के उत्पादक महिलाएं समूचे छत्तीसगढ़ में तैयार हो चुकी हैं..

दुर्ग, जशपुर, जांजगीर और चांपा जिले के साथ ही नवगठित सक्ती जिले के अकलतरा और पामगढ़ क्षेत्रों में भी महिलाओं द्वारा अनेक सजावटी और घरेलू उपयोग की वस्तुओं का निर्माण किया जा रहा है.

अपना श्रम  जब सार्थक होता है तो वह सिर्फ अच्छी आमदनी ही नहीं,बल्कि भरपूर आत्मसंतोष और सम्मान भी देता है. सिलसिला यूं ही चलता रहा तो वो दिन बहुत नजदीक है,

जब छत्तीसगढ़ आत्मसम्मान से लबरेज महिलाओं से भर ही जाए..महिला सशक्तिकरण के साक्षात दर्शन के लिए छत्तीसगढ़ एक माकूल जगह बनने वाली है..आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर घरेलू काम-काज के साथ-साथ ये महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजूबत कर रही हैं.

किसी घर का एक कामकाजी सदस्य समूचे घर की आर्थिक मजबूती बनाए रखने के लिए एक बहुत बड़ा आसरा होता है. गोधन न्याय योजना से जुड़ी छत्तीसगढ़ की महिलाएं जरूरत पड़ने पर अब अपने-अपने घरों में वहीं किरदार निभा रही हैं जो अब तलक पुरूषों की ही थाती हुआ करती थी.

अकलतरा विकासखण्ड के ग्राम कोटमी सोनार की शुभ महिला स्वण्सहायता समूह की महिलाएं मिट्टी के दीये, गुल्लक और मटकी बनाकर अब तक हजारों रूपए कमा चुकीं हैं. बम्हनीडीह और पामगढ़ की महिला समूहों ने भी मिट्टी की सामग्री से अच्छी आय अर्जित कर ली है.

नवगठित जिला सक्ती के जनपद पंचायत डभरा की स्वसहायता समूह की महिलाएं भी मिट्टी के दीये, गुल्लक, मटकी और सजावटी सामान बनाकर धन लक्ष्मी को खुश करने में सफल हो रही हैं.

इसी प्रकार जशपुर जिले के दुलदुला जनपद पंचायत और कुनकुरी विकासखण्ड के महिला स्वण्सहायता समूह द्वारा भी गोबर से दीया निर्माण कर अब तक 30 हजार रूपए से भी अधिक की आमदनी कर चुके हैं.

दुर्ग जिले के भिलाई में स्थित उड़ान नई दिशा समूह की महिलाओं ने कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा को गोबर से बनी फ़्यूज़न दीप रंगोली भेंट कर उनसे भी भूरी-भूरी प्रशंसा बटोरी है.

कलेक्टर ने कहा कि समूह की महिलाओं ने जो सजावटी उत्पाद तैयार किया हैं वो गुणवत्ता, सुंदरता जैसी हर हर कसौटी पर खरा है..उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता में मेहनत कर और एकजुट होकर समूह की महिलाओं ने कमाल की चीजें बनाई हैं…

यह बाजार की जरूरतों को पूरा करने और सभी को अपनी गुणवत्ता से आकर्षित करने वाली वस्तु साबित होंगी.. छत्तीसगढ़ माटी की ये कला देश के गिने जाने वाले बड़े शहरों के अलावा राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल जैसे कला के पारखियों के राज्य में भी लोगों के दिलों में घर बना रहा है..

बड़े शहरों में रंगोली बनाने के लिए जगह का अभाव होता है, इसलिए छत्तीसगढ़ की उन रंगोंलियों को प्राथमिकता से स्थान मिल रहा है जो आप घर के दरवाजे, टेबल या आंगन पर रख सकते हैं.

रंगोली में गोबर से बने दीये भी लगे हैं, जो इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा रहे होते हैं..सात्विक विचार पैदा कर देने वाले गोबर, पवित्रता के भाव जगा देने वाले गोबर और धार्मिकता बिखेर देने वाले गोबर का हिन्दू संस्कृति के साथ गहरा जुड़ाव है,

जिसके चलते गोबर का दीया एक दिन हिन्दोस्तान के लिए पहली पसंद भी बन सकता है. आने वाले समय में हमारे छत्तीसगढ़ में निर्मित गोबर का सजावटी सामान देश भर के समृद्ध ड्राईंग रूम को एंटिक लुक देने वाला सामान भी बन सकता है.. सिर्फ धान का कटोरा के रूप में पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ में विकास की वो गंगा बह चली है कि अब छत्तीसगढ़  नाम एक है मगर पहचान अनेक.

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