सम्यक नाहटा : जगदलपुर। शहर की पहचान और लगभग 364 एकड़ में फैला ऐतिहासिक दलपत सागर आज भी जलकुंभी के प्रकोप से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। करोड़ों रुपये की स्वीकृति और सफाई के दावों के बावजूद झील में जलकुंभी लगातार दिखाई दे रही है, जिससे निगम प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई के नाम पर हार्वेस्टर मशीन से केवल ऊपरी सतह की जलकुंभी हटाई जाती है, जबकि इसकी जड़ें और अवशेष पानी में ही रह जाते हैं। कुछ ही दिनों बाद जलकुंभी दोबारा पूरे क्षेत्र में फैल जाती है और सफाई अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है।
दलपत सागर की बदहाल स्थिति, 9 करोड़ के बजट के बावजूद नहीं सुधरी तस्वीर – Rashtravadi News
दलपत सागर की बदहाल स्थिति, 9 करोड़ के बजट के बावजूद नहीं सुधरी तस्वीर
दलपत सागर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि जगदलपुर की ऐतिहासिक धरोहर और प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, पर्यटक और मॉर्निंग वॉक करने वाले लोग पहुंचते हैं। इसके बावजूद झील की बदहाल स्थिति शहर की छवि पर भी सवाल खड़े करती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो उसका स्थायी परिणाम क्यों दिखाई नहीं दे रहा? क्या संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी? क्या केवल ऊपर-ऊपर की सफाई से सरकारी धन का सही उपयोग माना जा सकता है?
शहरवासियों की मांग है कि दलपत सागर को जलकुंभी से स्थायी रूप से मुक्त करने के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और करोड़ों रुपये की स्वीकृत राशि का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि जगदलपुर की इस ऐतिहासिक धरोहर की सुंदरता और पहचान बरकरार रह सके।
Author: RashtraVadi News
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