

बिजली संकट से जूझ रहा बांग्लादेश भारत से उम्मीद लगाए बैठा है। हालांकि बांग्लादेश को भारत से भी तत्काल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। भारत पहले ही उसे 2,656 MW से ज्यादा बिजली दे रहा है और अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए भारत को अपनी उत्पादन क्षमता को भी देखना होगा।
बिजली संकट का बड़ा असर बांग्लादेश के गारमेंट सेक्टर पर पड़ा है। देश के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 80% से ज्यादा है। BKMEA के सर्वे के मुताबिक, 55% निटवेयर फैक्ट्रियों के ऑर्डर रद्द हुए या कम हुए। 78% फैक्ट्रियों में उत्पादन घटा, जबकि 87% को सामान भेजने में देरी हुई। बिजली की कमी से निटिंग का उत्पादन 37-38%, डाइंग 51% और गारमेंट सिलाई का उत्पादन 40% तक घट गया। गैस और बिजली की कमी के चलते करीब 600 टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में उत्पादन रुकने की भी रिपोर्ट है। बिजली संकट का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। मयमनसिंह, बारिशाल, रंगपुर, सिलहट, राजशाही और खुलना में कई जगह रोज 3 से 10 घंटे तक बिजली कट रही है।
बिजली पैदा करने के लिए प्लांट में ईंधन की कमी
बांग्लादेश में बिजली बनाने वाले प्लांट पर्याप्त हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए जरूरी ईंधन की कमी हो गई है। खासकर प्राकृतिक गैस की सप्लाई घटने से गैस आधारित प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे। 2024-25 में बांग्लादेश की करीब 44% बिजली गैस से बनी थी। लेकिन देश में गैस का उत्पादन लगातार कम हुआ है।
बांग्लादेश अवामी लीग ने सरकार पर फोड़ा ठीकरा
बांग्लादेश में बिजली संकट पर विपक्षी पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग (Bangladesh Awami League) ने बीएनपी सरकार पर निशाना साधा है। बांग्लादेश अवामी लीग ने कहा कि एनर्जी का संकट सिर्फ़ फ़ैक्टरी फ़्लोर तक ही नहीं है — यह पूरी इकॉनमी को तबाह कर रहा है। BNP ने एनर्जी संकट खत्म करने के लिए कैंपेन चलाया। उन्हें भारी जीत मिली और इसके लिए दो-तिहाई बहुमत भी मिला। सात महीने बाद: गैस का प्रेशर 78% कम हो गया, लोड-शेडिंग और भी खराब हो गई, 55% निट फ़ैक्टरियों ने ऑर्डर कैंसिल या कम होने की रिपोर्ट दी। सुपरमैजोरिटी कोई बहाना नहीं है। यह एक ज़िम्मेदारी है। इसका इस्तेमाल करो, या मान लो कि तुम नहीं कर सकते।
बांग्लादेश में बिजली संकट की स्थिति पर, सेंटर फ़ॉर एनर्जी रिसर्च, यूनाइटेड इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर और रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपर्ट शहरयार अहमद चौधरी ने कहा कि अगर हम भारत, पाकिस्तान, या श्रीलंका जैसे आस-पास के देशों, यहाँ तक कि भूटान और नेपाल पर भी विचार करें। हालांकि भूटान और नेपाल में हाइड्रोपावर प्लांट हैं, भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने रिन्यूएबल एनर्जी, खासकर उपलब्ध रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स, सोलर और विंड के मामले में बहुत तरक्की की है। इसकी तुलना में, बांग्लादेश पीछे है। मेरा मतलब है, हमारे कुल जेनरेशन का लगभग 6 परसेंट रिन्यूएबल एनर्जी से आता है।
Author: RashtraVadi News
न्यूज़ से संबंधित जानकारी साझा करने के लिए हमसे संपर्क करें : 8839577226


















