स्थानीय भाषा से आसान होगी बच्चों की पढ़ाई, मधोता में छह दिवसीय बहुभाषी शिक्षक प्रशिक्षण शुरू

स्थानीय भाषा से आसान होगी बच्चों की पढ़ाई, मधोता में छह दिवसीय बहुभाषी शिक्षक प्रशिक्षण शुरू

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बस्तर। स्थानीय भाषा से आसान होगी बच्चों की पढ़ाई, बच्चों को उनकी मातृभाषा और स्थानीय परिवेश से जोड़कर शिक्षा को सरल, सहज और प्रभावी बनाने की दिशा में हाई स्कूल मधोता में सोमवार से छह दिवसीय बहुभाषी शिक्षा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। Language and Learning Foundation (LLF), FLN नींव एवं बहुभाषी शिक्षा के अंतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण में जोन के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए।

मातृभाषा के जरिए बच्चों तक पहुंचने पर जोर

प्रशिक्षण के पहले दिन शिक्षकों को नवीन पाठ्यक्रम आधारित शिक्षण पद्धतियों के साथ-साथ स्थानीय एवं मातृभाषा के माध्यम से बच्चों से प्रभावी संवाद स्थापित करने की तकनीकों से अवगत कराया गया।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि यदि बच्चों की मातृभाषा और स्थानीय परिवेश को कक्षा-कक्ष की शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ा जाए, तो कठिन विषय भी बच्चों के लिए अधिक सहज और रुचिकर बन सकते हैं। इससे बच्चों की समझ के साथ-साथ कक्षा में उनकी सहभागिता भी बढ़ाई जा सकती है।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, गतिविधियों से कराया कक्षा संचालन का अभ्यास

छह दिवसीय प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया। शिक्षकों को विभिन्न व्यावहारिक गतिविधियों और अभ्यासों के माध्यम से कक्षा संचालन की तकनीकें समझाई गईं।

शिक्षकों ने स्वयं गतिविधियों में भाग लेकर यह जाना कि बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से कैसे जोड़ा जाए, उनकी सहभागिता कैसे बढ़ाई जाए और कक्षा के माहौल को किस तरह रोचक एवं आनंददायक बनाया जा सकता है।

इसके अलावा बच्चों की सीखने की जरूरतों को पहचानने, स्थानीय परिवेश को पाठ्यक्रम से जोड़ने तथा गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को प्रभावी ढंग से कक्षा में लागू करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

छह दिनों में बहुभाषी शिक्षा और FLN पर होगा फोकस

प्रशिक्षण के आगामी दिनों में शिक्षकों को बहुभाषी शिक्षण, FLN (Foundational Literacy and Numeracy), बाल-केंद्रित गतिविधियों और स्थानीय संदर्भ आधारित शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसी शिक्षण तकनीकों से सशक्त करना है, जिनके माध्यम से बच्चों की भाषाई पृष्ठभूमि और स्थानीय अनुभवों को उनकी पढ़ाई से जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में नोडल हेम प्रकाश मरकाम, एलएलएफ बस्तर कोऑर्डिनेटर, मास्टर ट्रेनर राजेंद्र सिंह, संकुल प्राचार्य श्यामलाल नेताम, संकुल समन्वयक कृष्णा सिंह ठाकुर, हरदेव बघेल सहित जोन अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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Author: RashtraVadi News

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