सम्यक नाहटा : जगदलपुर : बस्तर : एक ओर सरकार बस्तर को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चला रही है और बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। अस्पताल परिसर और वार्डों में मच्छरों से बचाव के लिए कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है।

अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके परिजन रातभर मच्छरों के बीच रहने को मजबूर हैं। कई जगहों पर न तो मच्छरदानी की व्यवस्था है और न ही नियमित फॉगिंग या मच्छर भगाने के अन्य इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में मरीजों को इलाज के साथ-साथ मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर यदि मच्छर नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होंगे, तो मलेरिया मुक्त बस्तर का सपना कैसे पूरा होगा।

सबसे हैरानी की बात यह है कि इस समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी मौन नजर आ रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि जब खुद अस्पताल ही मच्छरों से सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम जनता को मलेरिया से कैसे बचाया जाएगा। जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग इस ओर तत्काल ध्यान दे और अस्पतालों में मच्छर नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
Author: RashtraVadi News
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