जगदलपुर। आदिवासी युवा छात्र संगठन (AYSU) बस्तर संभाग ने छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक GENCOR-35010/1981/2026 दिनांक 12 जून 2026 के विरोध में 19 जून को ज्ञापन सौंपते हुए आदेश को तत्काल वापस लेने अथवा संशोधित करने की मांग की है।

AYSU बस्तर संभाग के संभागीय अध्यक्ष लक्ष्मण बघेल ने जारी प्रेस वक्तव्य में कहा कि उक्त आदेश के तहत शासकीय विद्यालयों में दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र एवं अन्य धार्मिक गतिविधियों को अनिवार्य रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं, जो भारत के संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना तथा सांस्कृतिक विविधता के विपरीत हैं।

उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहाँ प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था, संस्कृति एवं परंपराओं के अनुसार जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। सरकारी विद्यालय किसी एक विशेष धर्म, पूजा-पद्धति अथवा धार्मिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार का माध्यम नहीं बन सकते।
AYSU ने कहा कि बस्तर सहित पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत हैं, जिनकी अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराएँ, मान्यताएँ एवं आस्था प्रणाली है। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान को अनिवार्य बनाना आदिवासी समाज सहित अन्य समुदायों की सांस्कृतिक पहचान एवं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
संगठन ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि—
उक्त आदेश को तत्काल वापस लिया जाए अथवा संशोधि किया जाए।.
विद्यालयों में संविधान, वैज्ञानिक सोच, नैतिक शिक्षा एवं राष्ट्रीय एकता पर आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए।
आदिवासी एवं अन्य समुदायों की सांस्कृतिक पहचान तथा संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28(1) का पालन सुनिश्चित किया जाए, जिसके अनुसार राज्य निधि से पूर्णतः पोषित किसी भी शैक्षणिक संस्था में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती।
AYSU बस्तर संभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन द्वारा इस आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से अपने विरोध को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा।
Author: RashtraVadi News
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