झीरम के सबूत थे तो NIA को क्यों नहीं दिए? CM साय का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले- राजनीतिक बयानबाजी से सच नहीं बदलता

झीरम के सबूत थे तो NIA को क्यों नहीं दिए? CM साय का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले- राजनीतिक बयानबाजी से सच नहीं बदलता

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झीरम मामले में NIA कोर्ट के फैसले के बाद CM साय का कांग्रेस पर पलटवार, भूपेश बघेल से पूछा—सबूत थे तो जांच एजेंसी को क्यों नहीं सौंपे?

रायपुर। झीरम घाटी मामले में NIA कोर्ट के हालिया फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के बयानों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस नेताओं के पास झीरम मामले से जुड़े सबूत थे, तो उन्होंने जांच एजेंसी को क्यों नहीं सौंपे? राजनीतिक बयानबाजी से न्यायिक प्रक्रिया और सच नहीं बदलता।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि झीरम मामले की जांच NIA को उस समय सौंपी गई थी, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार थी। करीब 13 वर्षों तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली। इस दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज हुए और उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 10 लोगों को दोषी ठहराया है, जबकि 16 सितंबर को सजा का निर्धारण किया जाएगा।
‘सबूत जेब में थे तो NIA को क्यों नहीं दिए?’
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए CM साय ने कहा कि जब वे विपक्ष में थे, तब कहा करते थे कि ‘सबूत जेब में लेकर घूम रहे हैं।’ अब सवाल यह है कि अगर उनके पास वास्तव में सबूत थे, तो उन्होंने उन्हें NIA के सामने क्यों नहीं रखा?
साय ने कहा कि जांच एजेंसी के सामने तथ्य और प्रमाण रखने के लिए कांग्रेस नेताओं के पास पर्याप्त समय था। आरोप लगाना आसान है, लेकिन आरोपों को साबित करने के लिए ठोस तथ्य और साक्ष्य जरूरी होते हैं। न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि सबूतों और तथ्यों के आधार पर चलती है।
कांग्रेस पर ‘फूट डालो और राज करो’ की राजनीति का आरोप
कांग्रेस में प्रभारियों के फेरबदल को लेकर भी मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति आज भी अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चल रही है। जहां कांग्रेस जाती है, वहां गुटबाजी और आपसी खींचतान शुरू हो जाती है।
उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने के बजाय कांग्रेस के नेता आपस में ही राजनीतिक लड़ाई में उलझे रहते हैं।
भूपेश बघेल के प्रभार बदलने पर भी कसा तंज
भूपेश बघेल के प्रभार में बदलाव को लेकर CM साय ने कहा कि जब उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तब वहां भी उनके विरोध की बातें सामने आई थीं। शायद उसी का नतीजा है कि अब उनका प्रभार बदल दिया गया है।
साय ने कहा कि कांग्रेस का आंतरिक संगठनात्मक बदलाव उसका अपना मामला है, लेकिन पार्टी के भीतर लगातार सामने आ रही गुटबाजी और खींचतान उसकी राजनीतिक कार्यसंस्कृति को दर्शाती है।
‘जनता को बयानबाजी नहीं, तथ्य और प्रमाण चाहिए’
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले उसे अपने भीतर झांकना चाहिए। एक ओर कांग्रेस नेता न्यायिक फैसलों पर सवाल उठाते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर ही लगातार विरोध और खींचतान दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता आरोप-प्रत्यारोप और भ्रम की राजनीति को समझती है। जनता को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि तथ्य और प्रमाण चाहिए।

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Author: RashtraVadi News

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