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बस्तर गोंचा महापर्व कल से: आस्था, परंपरा और संस्कृति का भव्य संगम

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जगदलपुर। बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भगवान जगन्नाथ के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक गोंचा महापर्व कल से पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू होगा। इस ऐतिहासिक पर्व को लेकर जगदलपुर सहित पूरे बस्तर अंचल में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।

गोंचा महापर्व बस्तर की पहचान माना जाता है। यह पर्व भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की रथयात्रा के साथ प्रारंभ होता है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु रथ खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पर्व की सबसे अनोखी परंपरा ‘तुपकी’ है, जिसमें बच्चे और युवा बांस से बनी पारंपरिक तुपकी से गोंचा (एक स्थानीय फल) चलाकर उत्सव मनाते हैं। यह परंपरा पूरे देश में बस्तर की अलग पहचान बनाती है।

प्रशासन ने महापर्व को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा, यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

गोंचा महापर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव है। कल से शुरू होने वाला यह महापर्व एक बार फिर बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि को पूरे देश के सामने प्रदर्शित करेगा।

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Author: RashtraVadi News

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