बीजापुर : नक्सल प्रभाव से मुक्त होते जा रहे बस्तर के इलाकों में अब एक नई तस्वीर सामने आ रही है। जहां पहले बंदूक की आवाज गूंजती थी, अब वहां के ग्रामीण विकास कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रहे हैं। बीजापुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में ग्रामीणों ने ठेकेदार और इंजीनियर की कथित मिलीभगत को उजागर करते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि नक्सल मुक्त होने के बाद क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार जरूर बढ़ी है, लेकिन इन कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता की भारी कमी देखने को मिल रही है। खासकर भैरमगढ़ ब्लॉक के अबूझमाड़ स्थित ग्राम पंचायत चिंगेर में आजादी के बाद पहली बार स्कूल भवन का निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण कार्य में आधुनिक तकनीक का उपयोग किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर आपसी सांठगांठ कर घटिया निर्माण कार्य कर रहे हैं, जिससे सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते इन अनियमितताओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो विकास कार्यों का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही वन मंत्री केदार कश्यप ने इन नक्सल मुक्त क्षेत्रों का दौरा कर विकास कार्यों की समीक्षा की थी। इसके बावजूद यदि भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है—अधिकारी-कर्मचारियों की, जनप्रतिनिधियों की, ठेकेदारों की या फिर पूरे सिस्टम की?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुकमा और अन्य नक्सल प्रभावित जिलों के ग्रामीण भी इसी तरह जागरूक होकर आवाज उठाने लगें, तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
नक्सल मुक्त होते बस्तर में अब असली लड़ाई विकास की गुणवत्ता और पारदर्शिता की है। यदि ग्रामीणों की यह जागरूकता लगातार बनी रही, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र न सिर्फ नक्सल मुक्त, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त भी बन सकता है।








