CIBIL स्कोर सुधारने का झांसा, 150 लोगों से लोन फ्रॉड का आरोप; दुर्ग समेत तीन जिलों में फैला ठगी का जाल

CIBIL स्कोर सुधारने का झांसा, 150 लोगों से लोन फ्रॉड का आरोप; दुर्ग समेत तीन जिलों में फैला ठगी का जाल

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दुर्ग। CIBIL स्कोर सुधारने, आसान लोन दिलाने और कमीशन से अतिरिक्त कमाई का लालच देकर लोगों के नाम पर इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराने वाले कथित गिरोह का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। दुर्ग के पद्मनाभपुर थाने में दर्ज इस लोन फ्रॉड मामले में अब तक करीब 150 पीड़ित सामने आ चुके हैं। इनमें दुर्ग के साथ-साथ बालोद और बेमेतरा जिले के लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।

आरोप है कि गिरोह लोगों को भरोसे में लेकर उनके नाम पर AC समेत महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस करवाता था। फाइनेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामान आरोपियों के कब्जे में चला जाता था। शुरुआत में कुछ EMI जमा कराकर भरोसा कायम किया जाता, लेकिन बाद में किस्तें बंद कर दी जाती थीं। इसके बाद फाइनेंस कंपनी की ओर से भुगतान के लिए संबंधित पीड़ितों से संपर्क किया जाता था।

मूक-बधिर युवक की शिकायत से खुला मामला

इस कथित फ्रॉड का खुलासा एक मूक-बधिर युवक की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस अब उन इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों और फाइनेंस कंपनियों से जानकारी जुटा रही है, जहां से पीड़ितों के नाम पर सामान फाइनेंस कराया गया था।

CIBIL स्कोर बढ़ाने और कमीशन का लालच

पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त 2026 को रायपुर निवासी 36 वर्षीय मनीष कुमार पांडे अपने भाई शुभम पांडे के साथ पद्मनाभपुर थाने पहुंचे। मनीष मूक-बधिर हैं और शिकायत दर्ज कराने में उनके भाई ने मदद की।

शिकायत के मुताबिक, शेखर देशमुख, अनुराग देशमुख और ऋषभ शर्मा ने मनीष को लोन का CIBIL स्कोर बढ़ाने और कमीशन मिलने का लालच दिया। इसके बाद महाराजा चौक स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान से उनके नाम पर AC फाइनेंस कराया गया।

मनीष के अनुसार, उनके नाम पर होम क्रेडिट फाइनेंस से करीब 44,600 रुपये का आठ माह का फाइनेंस कराया गया। आरोप है कि फाइनेंस प्रक्रिया के दौरान उनका मोबाइल आरोपियों के पास था। फाइनेंस पूरा होने के बाद आरोपी AC अपने साथ ले गए।

कुछ समय तक आरोपियों की ओर से EMI जमा की गई, लेकिन बाद में किस्तें बंद हो गईं। फाइनेंस कंपनी ने जब भुगतान के लिए मनीष से संपर्क किया तो कथित तौर पर उन्हें खुद कुछ EMI भरनी पड़ी।

सवाल पूछने पर धमकाने का आरोप

शिकायत में पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने लोन और फाइनेंस किए गए सामान के बारे में आरोपियों से सवाल किए तो उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया। कुछ लोगों से लोन की रकम का दबावपूर्वक सेटलमेंट कराने के आरोप भी सामने आए हैं।

हालांकि, इन सभी आरोपों की वास्तविकता पुलिस की विवेचना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस ने प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

100 से बढ़कर 150 पहुंची पीड़ितों की संख्या

करीब एक महीने पहले इस मामले में 100 से अधिक शिकायतें सामने आई थीं। अब पीड़ितों की संख्या बढ़कर करीब 150 हो गई है। पुलिस सभी शिकायतों का मिलान कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने लोगों के नाम पर लोन कराया गया, कितने इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस हुए और कथित तौर पर कितनी रकम का लेनदेन हुआ।

पुलिस द्वारा डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड, फाइनेंस दस्तावेज और अन्य संबंधित सबूत जुटाए जा रहे हैं।

मुख्य आरोपी ने किया था आत्मसमर्पण

मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आए ऋषभ शर्मा ने 24 जुलाई को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की। जांच के दौरान बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड, पासबुक, चेकबुक और मोबाइल खरीद से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए थे।

फिलहाल पुलिस मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पीड़ितों की बढ़ती संख्या ने कथित लोन फ्रॉड के दायरे को और बड़ा कर दिया है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होने की उम्मीद है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और पीड़ितों के नाम पर कितनी रकम का फाइनेंस कराया गया।

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Author: RashtraVadi News

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