बस्तर की खनिज संपदा पर ‘सिंडिकेट’ का डाका! NMDC का आयरन ओर निजी यार्ड में पहुंचने का आरोप, सुशील मौर्य ने उठाए बड़े सवाल

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31.5 टन आयरन ओर निजी यार्ड में खाली होने का मामला गरमाया, कांग्रेस ने भाजपा सरकार से मांगा जवाब; SIT जांच नहीं हुई तो NMDC मुख्यालय घेरने की चेतावनी

जगदलपुर। बस्तर की खनिज संपदा पर ‘सिंडिकेट’ का डाका! बस्तर की बहुमूल्य खनिज संपदा से जुड़े आयरन ओर के कथित तौर पर निजी यार्ड में पहुंचने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य ने आरोप लगाया है कि कुम्हारमारेंगा रेलवे साइडिंग से नगरनार स्टील प्लांट के लिए भेजा गया 31.5 टन आयरन ओर, जिसकी कीमत करीब 2.63 लाख रुपये बताई जा रही है, निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय सरगीपाल स्थित एक निजी यार्ड में खाली कराया गया।

सुशील मौर्य ने इसे महज चोरी का मामला नहीं, बल्कि बस्तर की खनिज संपदा से जुड़े बड़े और संगठित खेल की आशंका बताते हुए भाजपा सरकार और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

रेक पॉइंट से प्लांट के बजाय निजी यार्ड कैसे पहुंचा माल?

कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, बैलाडीला से कुम्हारमारेंगा रेलवे साइडिंग पहुंचा आयरन ओर ट्रकों के जरिए नगरनार स्टील प्लांट पहुंचाया जाना था। आरोप है कि एक ट्रक में लदा 31.5 टन माल प्लांट पहुंचने के बजाय सीधे सरगीपाल के एक निजी यार्ड में पहुंचा, जहां माल खाली करने के बाद वाहन वापस लौट गया।

मौर्य का दावा है कि NMDC विजिलेंस और ऑनलाइन रिकॉर्ड के मिलान के दौरान संबंधित खेप की प्लांट तक डिलीवरी नहीं मिलने की बात सामने आई। इसके बाद नगरनार, परपा और बोधघाट थानों में लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

‘एक ट्रक पकड़ा गया, तो बाकी खेपों का क्या?’

सुशील मौर्य ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एक वाहन की जांच में लाखों रुपये का आयरन ओर निर्धारित गंतव्य के बजाय निजी यार्ड में पहुंचता पाया गया, तो यह जांच का विषय है कि क्या पिछले महीनों में भी इसी तरह की अन्य खेपों के साथ गड़बड़ी हुई है?

उन्होंने परिवहन रिकॉर्ड, वजन पर्ची, रेक पॉइंट से निकलने का विवरण, प्लांट गेट एंट्री और डिलीवरी रिकॉर्ड की गहन जांच की मांग की है। साथ ही यह भी पूछा कि निर्धारित रूट से वाहन के विचलन की जानकारी निगरानी तंत्र को समय पर क्यों नहीं हुई।

‘गाड़ी और निजी यार्ड का मालिक सार्वजनिक करे सरकार’

कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा सरकार से सीधे सवाल करते हुए कहा कि जिस वाहन से आयरन ओर ले जाया गया, उसका मालिक कौन है? सरगीपाल स्थित निजी यार्ड का वास्तविक मालिक कौन है? क्या इस पूरे मामले में सिर्फ चालक और कुछ लोगों की भूमिका है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?

मौर्य ने आरोप लगाया कि यदि इस मामले में राजनीतिक या प्रभावशाली लोगों का संरक्षण सामने आता है तो उनके नाम भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल छोटे स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई करके मामले को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी है।

सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की निगरानी में SIT की मांग

सुशील मौर्य ने कहा कि बस्तर की खनिज संपदा जनता और प्रदेश की अमूल्य संपत्ति है। इसकी सुरक्षा और पारदर्शी उपयोग सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अथवा निष्पक्ष SIT से कराई जाए।

कांग्रेस ने मांग रखी है कि यार्ड मालिक, परिवहन नेटवर्क और कथित सिंडिकेट से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पिछले महीनों में कुम्हारमारेंगा साइडिंग से नगरनार प्लांट भेजी गई आयरन ओर की खेपों का भी रिकॉर्ड खंगाला जाए।

‘कार्रवाई नहीं हुई तो NMDC मुख्यालय का घेराव’

सुशील मौर्य ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित खनिज सिंडिकेट के मुख्य लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी NMDC मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करेगी।

उन्होंने कहा कि बस्तर की खनिज संपदा की कथित लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक संघर्ष करेगी।

नोट: निजी यार्ड, वाहन मालिक, राजनीतिक संरक्षण और बड़े पैमाने पर खनिज घोटाले से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

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Author: RashtraVadi News

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