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BRTS तोड़ने में देरी पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, ‘घर तोड़ना हो तो निगम को डंपर-बुलडोजर सब मिल जाता…

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Madhya Pradesh News: इंदौर बेंच ने बीआरटीएस की रैलिंग नहीं हटाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. खंडपीठ ने कहा कि निगम को जब किसी का घर तोड़ना रहता है तो सभी संसाधन मिल जाते हैं. बुलडोजर, डंपर, मजदूर लेकर काम कर देते हैं.

Indore court scathing comment: इंदौर बीआरटीएस (Indore BRTS) हटाने के आदेश फरवरी 2025 में जारी होने के बाद भी नहीं हटा है. इसे लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने आदेश के 9 महीने बाद भी बीआरटीएस की रैलिंग नहीं हटाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई. साथ ही कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए. इस दौरान इंदौर कलेक्टर और निगमायुक्त उपस्थित रहे.

दरअसल, शहर के बिगड़ते ट्रैफिक मामले में हाई कोर्ट के निर्देश पर कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त दिलीप यादव व्यक्तिगत तौर पर हाजिर हुए.

अधिकारियों ने कोर्ट में क्या कहा?

इस सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बीआरटीएस हटाने के लिए एजेंसी का चयन हो चुका है. बीआरटीएस हटाने का कार्य तीन महीने में पूरा होगा. वहीं बीआरटीएस की एक साइड 15 दिन में हटा दी जाएगी.

कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई

प्रशासनिक जज विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोदकुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आदेश के 9 महीने बाद भी बीआरटीएस की रैलिंग नहीं हटाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. खंडपीठ ने कहा कि निगम को जब किसी का घर तोड़ना रहता है तो सभी संसाधन मिल जाते हैं. बुलडोजर, डंपर, मजदूर लेकर काम कर देते हैं.

कोर्ट ने 5 वकीलों की एक और कमेटी बनाई

कोर्ट ने अधिकारियों के पक्ष सुनने के बाद आज आदेश से 15 दिन में बीआरटीएस की एक साइड की रेलिंग 15 दिन में हटाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही कोर्ट ने 5 वकीलों की एक और कमेटी बनाई है. इस कमेटी को 15 दिन में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है. इसके अलावा कलेक्टर, निगमायुक्त के साथ अगली पेशी पर दिसंबर को DCP ट्रैफिक को भी हाजिर रहने के निर्देश दिए हैं.

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