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चित्रकोट जलप्रपात में प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल, राजनीतिक दबाव का आरोप — सरपंच की पहल से ग्रामीणों ने संभाली सफाई

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चित्रकोट। विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात में बीते सात महीनों से फैली गंदगी, अव्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की कमी अब केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि राजनीतिक भेदभाव का मुद्दा बनती जा रही है। एसडीएम लोहंडीगुड़ा द्वारा नाका सील किए जाने के बाद से क्षेत्र की साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटक सुविधाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। जगह-जगह प्लास्टिक, शराब की बोतलें, पॉलीथिन और कचरे के ढेर पर्यटकों का स्वागत कर रहे हैं।

ग्राम पंचायत चित्रकोट के सरपंच भंवर मौर्य ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन्होंने इस गंभीर स्थिति को लेकर कई बार जिला कलेक्टर एवं एसडीएम लोहंडीगुड़ा को लिखित आवेदन दिया, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरपंच का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते जानबूझकर मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब चित्रकोट जैसी अंतरराष्ट्रीय पहचान वाली जगह पर सात महीनों तक कोई व्यवस्था नहीं की जाती, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि भेदभाव का संकेत है।

प्रशासन की निष्क्रियता के बीच सरपंच भंवर मौर्य की पहल पर 1 जनवरी 2026 से नववर्ष के नए संकल्प के साथ ग्रामीणों द्वारा लगातार श्रमदान अभियान चलाया जा रहा है। पिछले चार दिनों से ग्रामीण स्वेच्छा से सफाई कार्य कर रहे हैं, जो प्रशासन के लिए आईना है।

सरपंच भंवर मौर्य ने कहा,

“चित्रकोट किसी पार्टी का नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ की धरोहर है। अगर प्रशासन राजनीतिक चश्मे से देखेगा, तो जनता श्रमदान से जवाब देगी।”

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की यह पहल एक ओर जहां सराहनीय है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या राजनीतिक कारणों से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की उपेक्षा की जा सकती है?

अब नजर शासन-प्रशासन पर है कि वह कब नींद से जागकर चित्रकोट जलप्रपात की गरिमा के अनुरूप जिम्मेदारी निभाता है।

RashtraVadi News
Author: RashtraVadi News

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