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जमीन की नई गाइडलाइन पर बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का विरोध तेज, आम जनता पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

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जगदलपुर। राज्य सरकार द्वारा ज़मीनों के लिए जारी की गई नई गाइडलाइन को लेकर बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन ने सांसद महेश कश्यप को पत्र लिखकर बताया कि गाइडलाइन दरों में 25–26 हेक्टेयर के मद में हुई भारी वृद्धि पूरी तरह अव्यवहारिक और आम जनता के हितों के विरुद्ध है।

चेंबर के अनुसार नई गाइडलाइन के चलते ज़मीन खरीदना और घर बनाना आम आदमी के लिए लगभग असंभव हो जाएगा। ज़मीनों के वास्तविक (बाजार मूल्य) दरों से भी अधिक पंजीयन शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क देना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी 300% तक और शहर के कई इलाकों में 500% तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पहले कभी नहीं हुई।

बताया गया है कि पहले जिन भूखंडों का मूल्य 35% विकास दर के भीतर तय होता था, अब वही भूमि नई गाइडलाइन में कई गुना महंगी दिख रही है। इससे न केवल खरीदारों पर बोझ बढ़ेगा बल्कि व्यवसायिक गतिविधियों, निर्माण कार्यों और निवेश पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

चेंबर अध्यक्ष श्याम सोमानी ने कहा कि सरकार का यह निर्णय वास्तविकता से परे है और इससे बस्तर के व्यापारियों, किसानों तथा आम नागरिकों पर भारी असर पड़ेगा। उन्होंने मांग की है कि सरकार अव्यवहारिक गाइडलाइन को वापस ले और नई दरों को पुनः विचार कर व्यावहारिक स्तर पर लागू करे।

संगठन ने उम्मीद जताई है कि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को गंभीरता से उठाकर प्रदेश सरकार से उचित समाधान निकालने की पहल करेंगे।

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