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जिला पंचायत CEO के खिलाफ FIR की मांग, BSP ने अंबेडकर चौक पर दिया धरना; कलेक्ट्रेट का घेराव, 7 दिन का अल्टीमेटम

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बिलासपुर। जिला पंचायत बिलासपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) संदीप अग्रवाल के खिलाफ अनुसूचित जनजाति वर्ग के पंचायत सचिव तुलसी कुमार ध्रुव को कथित रूप से जातिगत आधार पर प्रताड़ित करने का मामला गरमा गया है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की जिला इकाई ने सोमवार को अंबेडकर चौक पर धरना प्रदर्शन किया।

इसके बाद कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर राज्यपाल के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में CEO संदीप अग्रवाल के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत FIR दर्ज करने, उन्हें तत्काल निलंबित करने और सेवा से बर्खास्त करने की मांग की गई है।

BSP जिलाध्यक्ष हेमचंद मिरी ने आरोप लगाया कि तुलसी ध्रुव, जो अनुसूचित जनजाति की गोंड जाति से आते हैं, को जिला पंचायत CEO द्वारा लगातार जातिगत दुर्भावना के चलते प्रताड़ित किया जा रहा है। पार्टी ने प्रशासन को सात दिन का समय दिया है। मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है। ज्ञापन में आंदोलन से उत्पन्न स्थिति की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात कही गई है।

बैठक में सरनेम पूछने के बाद बाहर निकलवाने का आरोप

ज्ञापन के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 को सकरी स्थित वन चेतना केंद्र में बैठक आयोजित हुई थी। आरोप है कि बैठक में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने तुलसी ध्रुव से उनका सरनेम पूछा गया। इसके बाद कार्रवाई की धमकी देते हुए CEO ने अपने निजी सुरक्षा कर्मी के माध्यम से तुलसी ध्रुव को कथित तौर पर बलपूर्वक बैठक हॉल से बाहर निकलवा दिया

।घटना के बाद तुलसी ध्रुव ने उसी दिन 24 अप्रैल को थाना सकरी में आवेदन देने का प्रयास किया। BSP के अनुसार, आवेदन में जिला पंचायत CEO के खिलाफ प्रताड़ना की शिकायत की गई थी, लेकिन थाना सकरी ने आवेदन स्वीकार नहीं किया और कथित रूप से उन्हें वहां से लौटा दिया।

बिना शिकायत 8 सदस्यीय जांच दल बनाने का आरोप

ज्ञापन में दूसरा गंभीर आरोप ग्राम पंचायत नगोर्ड में जांच को लेकर लगाया गया है। BSP का कहना है कि तुलसी ध्रुव के पदस्थ ग्राम पंचायत नगोर्ड में किसी शिकायत के बिना ही जिला पंचायत कार्यालय के आदेश क्रमांक शिकायत/पंचा/2024/824, बिलासपुर, दिनांक 24 अप्रैल 2026 के माध्यम से आठ सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया गया।

BSP ने इस जांच को नियम विरुद्ध बताते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ पंचायत कार्यवाही के निरीक्षण नियम, 1995 के नियम 3 तथा निरीक्षण संबंधी प्रावधानों के अनुसार पंचायत की कार्यवाही के निरीक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारियों का प्रावधान है। ज्ञापन में नियम के तहत ग्राम पंचायत के मामले में वरिष्ठ आंतरिक लेखा परीक्षण एवं करारोपण अधिकारी, जिला अंकेक्षक पंचायत तथा संबंधित अनुविभागीय अधिकारी का उल्लेख किया गया है।

इसी तरह, छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 88 का हवाला देते हुए कहा गया है कि पंचायत कार्यालयों की जांच राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी से कराई जा सकती है। ज्ञापन के अनुसार, जिले का कलेक्टर भी ग्राम पंचायत के कार्यकलापों की जांच ऐसे शासकीय अधिकारी से करा सकता है, जो द्वितीय श्रेणी से निम्न श्रेणी का न हो।

BSP का आरोप है कि इसके बावजूद जिला पंचायत CEO द्वारा जातिगत दुर्भावना से तुलसी ध्रुव को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से जनपद पंचायत तखतपुर, जिला बिलासपुर के वर्ग-3 अधिकारियों-कर्मचारियों का संयुक्त जांच दल गठित कर ग्राम पंचायत में जांच कराई गई।

समाज ने कलेक्टर को दिया ज्ञापन, आयोगों और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा मामला

मामले को लेकर SC-ST समाज संयुक्त मोर्चा तखतपुर ने 27 अप्रैल 2026 को कलेक्टर बिलासपुर को ज्ञापन सौंपा था। इसमें CEO संदीप अग्रवाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ बर्खास्तगी और सेवा समाप्ति की मांग की गई थी।

ज्ञापन के मुताबिक, कथित प्रताड़ना से परेशान होकर तुलसी ध्रुव ने 4 मई 2026 को प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की। इसके बाद 13 मई 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली को भी शिकायत भेजी गई।

शिकायत की जानकारी के बाद जांच रोकी, फिर 9 जून को दोबारा जांच का आरोप

BSP ने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि शिकायतों की जानकारी जिला पंचायत CEO संदीप अग्रवाल को मिलने के बाद ग्राम पंचायत नगोई की जांच को मौखिक निर्देश देकर रोक दिया गया था। आरोप है कि मामला शांत होने के बाद जांच दल को फिर निर्देशित किया गया और 9 जून 2026 को दोबारा जांच कराई गई।

जांच दल ने ग्राम पंचायत नगोई में कराए गए निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी किया। ज्ञापन में दावा किया गया है कि जांच के दौरान सभी निर्माण कार्य पूर्ण पाए गए और इसका उल्लेख जांच प्रतिवेदन में किया गया है।

13 जुलाई को कारण बताओ नोटिस, 27 जुलाई को जवाब; 3 अगस्त को निलंबन

मामले में जिला पंचायत की ओर से 13 जुलाई 2026 को तुलसी ध्रुव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। BSP के अनुसार, तुलसी ध्रुव ने निर्धारित समयावधि के भीतर 27 जुलाई 2026 को साक्ष्य और दस्तावेजों के साथ अपना जवाब प्रस्तुत किया।

इसके बावजूद, ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 3 अगस्त 2026 को तुलसी ध्रुव, सचिव ग्राम पंचायत नगोई को निलंबित कर दिया गया। BSP ने इसे कथित जातिगत प्रताड़ना की कार्रवाई से जोड़ते हुए CEO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

SC-ST एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर के पत्र क्रमांक एफ-13-16/2012/आ.प्र./1-3 का हवाला देते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

BSP ने कहा है कि सार्वजनिक दृष्टिगोचर स्थान पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य का अपमान करने के आशय से उसे अपमानित या आतंकित करना दंडनीय अपराध है। इसी आधार पर पार्टी ने तुलसी ध्रुव के साथ हुई कथित जातिगत प्रताड़ना को लेकर तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है।

हालांकि, ज्ञापन में धारा 16(X) का उल्लेख किया गया है, जबकि सार्वजनिक रूप से SC/ST सदस्य के अपमान/अपमानित करने से संबंधित अपराध का प्रावधान अधिनियम की धारा 3(1)(r) में आता है। इसलिए FIR की धाराएं तय करना पुलिस और सक्षम जांच एजेंसी का विषय होगा।

राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, सात दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

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Author: RashtraVadi News

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