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अंबिकापुर में पत्रकार से सरेआम मारपीट FIR दर्ज, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं — पत्रकार संगठनों ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

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छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—प्रेस की स्वतंत्रता—को भी कठघरे में ला खड़ा किया है।

क्या है पूरा मामला?

शहर के व्यस्त गुदड़ी चौक क्षेत्र में कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो रहा था। इसी दौरान एक स्थानीय पत्रकार मौके पर पहुँचा और घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कैमरा देखते ही कुछ कार्यकर्ता भड़क उठे और पत्रकार को रिकॉर्डिंग बंद करने के लिए कहा। पत्रकार ने अपने पेशेवर दायित्व का हवाला देते हुए कैमरा बंद करने से इनकार किया, जिसके बाद कथित रूप से उसके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

आरोप है कि इस दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी गई। यह पूरी घटना सार्वजनिक स्थान पर, लोगों और पुलिस की मौजूदगी में हुई।

FIR दर्ज, पर गिरफ्तारी नहीं

मामले में कोतवाली थाना, अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 0128/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण कायम किया है।

हालांकि, खबर लिखे जाने तक किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, जिससे पत्रकार समुदाय में रोष व्याप्त है।

“आपको विधायक को जवाब देना होगा” — बयान ने बढ़ाया विवाद

घटना का सबसे चिंताजनक पहलू वह कथित बयान है, जो एक पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में कहा गया—

“आप विधायक को जवाब देना होगा।”

यह वाक्य केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि उस मानसिकता का प्रतीक माना जा रहा है जिसमें कानून से ऊपर राजनीतिक संरक्षण को स्थापित करने की कोशिश झलकती है। पुलिस की वर्दी संविधान और कानून के प्रति जवाबदेह होती है, न कि किसी दल या जनप्रतिनिधि के प्रति।

यदि खुले मंच पर इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल होता है, तो यह प्रशासनिक तंत्र और विधि-व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।

पत्रकार संगठनों का कड़ा रुख

घटना के बाद विभिन्न पत्रकार संगठनों ने नाराज़गी जाहिर करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।

सवाल अब भी कायम है —

क्या लोकतंत्र में सच दिखाना अपराध बनता जा रहा है?

या फिर कानून से ऊपर राजनीतिक दबाव हावी हो रहा है?

RashtraVadi News
Author: RashtraVadi News

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