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JAGDALPUR : भजन संध्या में झूमें भगवान अय्यप्पा स्वामी के उपासक

भजन संध्या में झूमें भगवान अय्यप्पा स्वामी के उपासक

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सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में अर्धरात्रि तक चला भजनों का सिलसिला

जगदलपुर। श्री अय्यप्पा स्वामी भक्त मंडली जगदलपुर द्वारा रविवार को आयोजित भजन संध्या में भजनों का सिलसिला आधी रात तक जारी रहा। विगत 16 अक्टूबर से 41 दिनों की मंडल दीक्षा मे लीन भगवान अय्यप्पा स्वामी के भक्त बालाजी मंदिर में आयोजित भजन संध्या में जमकर झूमे।

भजन संध्या में झूमें भगवान अय्यप्पा स्वामी के उपासक
         भजन संध्या में झूमें भगवान अय्यप्पा स्वामी के उपासक

 

तेलंगाना के भद्राचलम से पधारे रामबाबु स्वामी एवं साथियों के भजनों के बीच मंडल दीक्षा ले रहे उपासकों ने भी भजन संध्या में सुर ताल मिलाया। संगीतमय कार्यक्रम में अय्यप्पा स्वामी के भक्तों के साथ- साथ शहरवासी भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

भजन संध्या में आगंतुक अतिथियों के अलावा गुरु स्वामी चप्पा श्रीनिवास राव, पिठाधिपति एसवीआरवी प्रसाद, गुरु स्वामी बीडीवी जगदीश, के कामेश्वर राव, के. वेंकटरमना, सीएच रामकृष्णा, ईंटी मंगाराजु, शिवा पटनायक, ई. अर्जुन राव, सिम्हाद्री श्रीनु, सिद्धार्थ राव, ईंटी मनोहर, आर नवीन राव चंटी आदि ने भद्राचलम से आये भजन गायकों के सुर से सुर मिलाते वातावरण भक्तिमय बना दिया। भक्ति भाव में डूबे भजन गायकों ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को देर रात तक बांधे रखा। आरती के पश्चात रात में आयोजित प्रसाद वितरण (भंडारा) में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

रंग बिरंगे फूलों और केले के तने से सजा भगवान का मंडप

केरल राज्य स्थित सबरीमाला मंदिर के मुख्य द्वार की 18 सीढ़ियों सहित देव प्रतिमाओं के प्रतीक स्वरूप की गई विशेष सज्जा भजन संध्या के अवसर पर भक्तों के आकर्षण का केंद्र रही। मंडल दीक्षा ले रहे श्रद्धालुओं ने केले के तने और आंध्र प्रदेश के राजमहेंद्री से मंगाए गए रंग-बिरंगे फूलों से स्वयं भगवान का मंडप सजाया था। बता दे की सबरीमाला मंदिर की 18 सीढ़ियां से जुड़ी कई मान्यताएं हैं।

सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार पहली पांच सीढ़ियां पांच इंद्रियों का प्रतीक हैं। अगली आठ मनुष्य के आठ भावों के प्रतीक हैं। इसके बाद तीन सीढ़ियां तीन गुणों को दर्शाती हैं और आखिरी दो सीढ़ियां विद्या और अविद्या की प्रतीक हैं। इन सीढ़ियों को 18 पुराणों, सबरीमाला के आसपास के 18 पहाड़ों, अयप्पा के 18 शस्त्रों, 18 सिद्ध पुरुषों, 18 देवताओं और 18 गुणों से भी जोड़ा जाता है।

दीक्षा के 41वें दिन 26 नवंबर को संपन्न होगा इरुमुड़ी विधान। 

16 अक्टूबर से दीक्षारत उपासक 41 दिनों का व्रत पूरा कर 26 नवंबर को शबरीमाला के लिए रवाना होंगे। बुधवार को 41 दिनों से काले वस्त्र धारण कर कठिन व्रत का पालन कर रहे उपासक अय्यप्पा स्वामी के दर्शनार्थ रवाना होंगे। बुधवार को ही सुबह 10 बजे से महत्वपूर्ण विधान इरूमुड़ी की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। बालाजी मंदिर प्रांगण में आयोजित पूजा विधान के पश्चात दोपहर में भक्तों को प्रसाद वितरण किया जाएगा। आंध्र समाज के अध्यक्ष एम. जयंत नायडू ने बताया कि इसी दिन संध्या 6 बजे उपासक बालाजी मंदिर से माँ दंतेश्वरी मंदिर के लिए पैदल रवाना होंगे। यहीं से बस में सवार होकर सबरीमाला के लिए रवाना होंगे।

RashtraVadi News
Author: RashtraVadi News

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