जेल में बंदी की संदिग्ध मौत पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव और DGP से मांगा व्यक्तिगत शपथपत्र

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

बिलासपुर। महासमुंद जिला जेल में हत्या के आरोप में बंद बंदी नीरज भोई की संदिग्ध मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर 35 चोटों के निशान मिलने की बात सामने आने के बाद कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा है। दोनों अधिकारियों को 31 अगस्त तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

35 चोटों के निशान ने खड़े किए गंभीर सवाल

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जेल जैसी सुरक्षित हिरासत में बंद व्यक्ति की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने विशेष रूप से पोस्टमार्टम में मिले 35 चोटों के निशानों को लेकर राज्य से स्पष्ट जवाब मांगा है।

कोर्ट ने कहा कि हिरासत में मौजूद व्यक्ति पूरी तरह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के भरोसे होता है। ऐसे में लॉकअप या जेल के भीतर हिंसा और मौत की घटनाएं कानून के शासन और राज्य की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला

सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें हिरासत में मौत की जांच CBI से कराने और पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने भी हिरासत में होने वाली हिंसा को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति जेल की चारदीवारी के भीतर होता है, तब उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य और संबंधित अधिकारियों की होती है।

परिवार को 7.50 लाख रुपये मुआवजा, फिर भी उठे सवाल

राज्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मृतक के परिवार को 7.50 लाख रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। जिला जेल महासमुंद के सहायक जेल अधीक्षक की 21 सितंबर 2025 की सूचना के अनुसार, यह राशि 20 सितंबर 2025 को परिजनों को भुगतान की गई थी।

हालांकि, मुआवजा दिए जाने के बावजूद हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को लेकर राज्य के शीर्ष अधिकारियों से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगना जरूरी समझा है।

31 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और DGP को अपने शपथपत्र में स्पष्ट रूप से बताने का निर्देश दिया है कि धारा 302 के मामले में जेल में बंद नीरज भोई की मौत किन परिस्थितियों में हुई और पोस्टमार्टम में उसके शरीर पर 35 चोटों के निशान कैसे पाए गए।

अब सभी की निगाहें 31 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि राज्य सरकार की ओर से दाखिल होने वाला शपथपत्र इस मामले की जांच की दिशा और जिम्मेदारी तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

RashtraVadi News
Author: RashtraVadi News

न्यूज़ से संबंधित जानकारी साझा करने के लिए हमसे संपर्क करें : 8839577226

Leave a Comment

और पढ़ें