जगदलपुर। आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली में बन रहे स्टील प्लांट के लिए बस्तर के बैलाडीला क्षेत्र से पाइपलाइन के माध्यम से लौह अयस्क ले जाने की योजना है इससे बस्तर में भयावह जलसंकट की स्थिति बन जाएगी। इतना ही नहीं शबरी नदी का लगभग 7 अरब लीटर पानी खराब होगा। नदी नाले और खेत जहरीले हो जाएंगे।

बैलाडीला में एनएमडीसी के लौह अयस्क को मेसर्स आर्सेलर मित्तल निप्पान स्टील इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कुआकोंडा जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में स्थित बेनिफिकेशन प्लांट से विशाखापट्टनम तक लेकर जा रहा है। वर्तमान में इसकी क्षमता 8 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। जिसमें 12000 केएलडी पानी की खपत होती है। कंपनी इसकी क्षमता बढ़ाकर 12 मिलियन टन प्रतिवर्ष करने जा रही है जिसके लिए लगभग 98.43 एकड़ भूमि के नीचे से पाइपलाइन ले जाई जाएगी। इस विस्तार से पानी की खपत 18000 केएलडी होगी।
ग्रामीणों ने अलग-अलग मुद्दों पर इसका विरोध किया है। शबरी नदी में विलुप्त प्रजाति के झींगे के संरक्षण करने का आदेश सरकार ने पूर्व से लागू किया हुआ है।लेकिन पानी के संयंत्र में उपयोग से झींगा की इस प्रजाति के संरक्षण पर भी सवाल उठेगा। कंपनी के अफसर 154 लोगों को नौकरी देने का वादा कर रहे हैं, लेकिन प्रभावितों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है।
नदी के पानी के ज्यादा दोहन से राजकीय वृक्ष साल, सागौन सहित कई औषधीय प्रजाति के वृक्षों पर भी अस्तित्व का खतरा बन जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा आयोजित जनसुनवाई के लिए प्रकाशित किए गए ज्ञापन में भी इस परियोजना के बहुत से तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया है। जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और जन आंदोलन की स्थिति बन रही है।
बस्तर में पांचवी अनुसूची के साथ ही पेसा कानून लागू है। आर्सेलर मित्तल निप्पान स्टील इंडिया प्रबंधन और सरकार को चाहिए कि ग्राम सभा को विश्वास में लेते हुए ही सबके हित में और सर्वसम्मति से इस दिशा में कदम उठाए।









